बैंकों के ड्राप बॉक्स में अब चेक भी सेफ नहीं
मजदूरों को अब उनके खाते में मजदूरी का भुगतान किया जा रहा है। जिन मजदूरों के खाते नहीं हैं उन्हें भी खाते खुलवाने के लिए प्रेरित किया गया है। संभल की एग्रीकल्चर फर्म ने मजदूरों को इस महीने की सात तारीख को चेक से भुगतान किए हैं। दूसरी निर्यात फर्में भी कारोबार को रफ्तार देने के लिए चेक तथा आरटीजीएस के विकल्पों का इस्तेमाल कर रही हैं।
एलडीएम सतीश कुमार गुप्ता ने बताया कि अधिकतर लोग मजदूर अनपढ़ होते हैं। इसलिए वे ऑन लाइन बैंकिंग या चेक से भुगतान प्राप्त करने से इनकार करते हैं लेकिन जब से नोटबंदी हुई तब से नजरिए में बदलाव हुआ है। कारखाना मालिकों और व्यापारियों ने मजदूरी के भुगतान करने के लिए चेक तथा आरीटीजीएस एवं एनईएफटी करना शुरू कर दिया है। लेकिन दिक्कत वहां आ रही है जहां पर मजदूर खाते नहीं खोल रहे हैं।
हालांकि खाते खुलवाने के लिए अभियान छेड़ दिया गया है और 26 नवंबर से शुरू हुए अभियान में अब तक 7102 खाते खुल चुके हैं। अभियान अभी जारी है। कृषि यंत्र उद्योग के संचालक सुरेश गर्ग ने बताया कि जब से नोटबंदी हुई तब से दिक्कत है। मजदूरों को खाते खुलवाने के लिए कहा गया है लेकिन कई मजदूरों ने खाते नहीं खुलवाए। जिन मजदूरों के खाते खुल गए हैं उनके खाते में बैंक के माध्यम से धनराशि क्रेडिट कराई गई है।