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संभल के जज्बे को सलाम, आशंकाओं के बीच अमन बनाए रहे हिंदू और मुसलमान

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संभल के आर्य समाज रोड पर अयोध्या फैसला आने के बाद ब्रज वाहन पर मुस्तैद आरएएफ का जवान। - फोटो : SAMBHAL
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संभल। अतीत में सांप्रदायिक दंगे होने की वजह से समय-समय पर संभल की पहचान के साथ सांप्रदायिक विवादों को जोड़कर देखा जाता रहा है लेकिन शनिवार को एक बार फिर संभल की जनता ने अमन और चैन बनाए रखा।
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संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय हित को महत्व दिया। न कोई अफवाह फैली और न ही कहीं कोई विवाद हुआ। यहां के नेताओं ने भी समझदारी दिखाई। साथ ही जनता ने परिपक्वता का परिचय दिया। कोई कुछ भी कहे पर संभल के लोग अब समझदारी दिखाते हुए देश की तरक्की में भागीदारी निभा रहे हैं। संभल की जनता के इस जज्बे को सलाम किया जा सकता है। आम लोगों को भी बधाई दी जा सकती क्योंकि उन्होंने अपनी और अपने शहर की पहचान को विकास के साथ जोड़ दिया है। इसलिए अब संभल की पहचान भी बदल रही है।
अयोध्या मुद्दे को लेकर संभल को अतीत में कई बार संवेदनशील शहरों की श्रेणी में लिया गया है। संभल के सांसद डा. शफीकुर्रहमान बर्क बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के सदस्य भी रह चुके हैं। अयोध्या मुद्दे पर फैसला आने से पहले ही उन्होंने साफ कर दिया था कि कोर्ट का फैसला कुछ भी आए उन्हें मंजूर है। लोगों को भी मंजूर होना चाहिए। इस बात को उन्होंने कोर्ट का फैसला आने के बाद आगे बढ़ाया है।
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वहीं आम लोगों ने अपनी समझदारी दिखाई। मुख्य बाजार हो या फिर शहर की मिश्रित आबादी का क्षेत्र, सभी स्थानों पर लोग अपने रोजमर्रा के काम में व्यस्त नजर आए। हां कुछ स्थानों पर दुकानें बंद थीं। इसके पीछे कुछ लोगों की आशंकाएं थीं।
वहीं कुछ लोगों ने एहतियाती सुरक्षा में अपने प्रतिष्ठान खुद बंद किए थे। ऐसे लोगों ने जब दोपहर बाद देखा कि हालात सामान्य हैं तो अपने प्रतिष्ठान खोले और कारोबार भी किया। इससे जाहिर है कि संभल के लोग अमन पसंद और शांति व्यवस्था बनाए रखने में शासन-प्रशासन के सहयोगी हैं।
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