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एटीएम की लाइन में लगा रहा बेटा, दुनिया से चल बसा पिता

Tue, 06 Dec 2016 01:46 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, संभल
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हादसा
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। दौड़ भागकर इधर-उधर से दस हजार रुपये का इंतजाम किया। पैसे लेकर अस्पताल पहुंचा तब तक पिता की मौत हो चुकी थी। उधार के दस हजार भी उसके काम नहीं आ सके। घटना सोमवार की है। 
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संभल जिले के नखासा थाना क्षेत्र के अबूनगर निवासी प्रेमपाल (52) पुत्र सुंदर को रविवार की रात सीने में दर्द की शिकायत हुई। बेटा सोनू मां गीता के साथ सुबह जिला अस्पताल लेकर पहुंचा। जहां इमरजेंसी में मौजूद ईएमओ डॉ. एनके ओझा ने इलाज किया, लेकिन प्रेमपाल की हालत देखकर दिल्ली ले जाने की सलाह दी। डॉक्टर के मुताबिक मरीज को दिल का दौरा पड़ा था। अगले 72 घंटे उसकी सेहत में लिए क्रिटिकल था, लेकिन दिल्ली ले जाने के लिए परिजनों के पास एंबुलेंस का किराया तक नहीं था।

इसके बाद सोनू पैसे के इंतजाम में लग गया। खुद एटीएम की लाइन में लगा, लेकिन पैसे नहीं मिले। वहीं रिश्तेदारों को बैंकों में भेजा, उन्हें भी मायूसी हाथ लगी। बाद में इधर-उधर दौड़भाग कर उधार लेकर दस हजार रुपये का इंतजाम किया। दोपहर दो बजे अस्पताल पहुंचा तो पता चला कि दो घंटे पहले ही पिता की मौत हो चुकी है। मां पिता का शव लेकर घर जा चुकी थी। 
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पिता इलाज के लिए बैंक की कतार में रहा, अस्पताल में बेटे की मौत
बहजोई। बीमार बेटे का उपचार कराने को पिता बैंक की कतार में भुगतान के लिए घंटों लगा रहा। इस बीच निजी अस्पताल में बेटे की हालत बिगड़ गई। बेटे ने मुरादाबाद ले जाते समय दम तोड़ दिया। 
थाना धनारी के गांव सिकरौरा भूड़ निवासी शराफत के 19 वर्षीय पुत्र अरमान की इलाज के लिए मुरादाबाद जाते समय मौत हो गई। शराफत ने बताया कि दो दिन पहले उसके पुत्र के पेट में दर्द उठा था। इलाज के लिए बेटे को बहजोई के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। इलाज के लिए रुपयों की जरुरत थी। सोमवार को सुबह नौ बजे वह बहजोई स्थित इलाहाबाद बैंक में अपने खाते से 15 हजार रुपये निकालने के लिए कतार में लगा था। कतार लंबी थी।

दोपहर दो बजे जब तक नंबर नहीं आया और तब तक बेटे की हालत बिगड़ने लगी तो वह घबराया हुआ निजी अस्पताल पहुुंचा। जहां चिकित्सक ने बेटे की हालत गंभीर बताते हुए उसके बेटे को मुरादाबाद के लिए रेफर कर दिया। जैसे-तैसे पैसों का इंतजाम कर वह बेटे को लेकर मुरादाबाद के लिए चल पड़ा, लेकिन रास्ते में ही उसके बेटे ने दम तोड़ दिया। मौत की सूचना से परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुुरा हाल था। शराफत ने बताया कि अगर उसके पास बैंक में कतार लगने की मजबूरी न होती तो वह अपने बेटे को सुबह ही मुरादाबाद ले जाता और हो सकता है कि उसकी जान बच जाती।
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