असमोली (संभल)। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र असमोली में न तो एक्स-रे की सुविधा उपलब्ध है और न ही हेपेटाइटिस-सी की दवाई उपलब्ध है। ऐसे में मरीजों को जिला अस्पताल की दौड़ लगानी पड़ती है। यदि समय से नहीं पहुंचे तो वहां से भी मायूस होकर लौटना पड़ता है। जो सुविधाएं सीएचसी में मिल जानी चाहिए थीं उन्हें उसके लिए 12 किमीं का सफर तय कर जिला अस्पताल जाना पड़ता है।
शनिवार को सीएचसी की पड़ताल की तो मरीजों को होने वाली असुविधाओं की जानकारी सामने आई। इस सीएचसी क्षेत्र के गांव रामनगर में हेपेटाइटिस-सी के मरीज जिले में सबसे पहले मिले थे। आंकड़ों के मुताबिक अभी भी 50 सक्रिय मरीज हैं। इसके बाद भी न सीएचसी में जांच की बेहतर व्यवस्था है और न दवाई ही वितरण की जाती है। हेपेटाइटिस-सी की जांच किट से की जाती है। दवाई के लिए जिला अस्पताल जाना पड़ता है। इसके अलावा टीबी रोगी या हादसे में घायल को एक्स-रे की सुविधा नहीं मिलती। जबकि नियमानुसार सीएचसी में एक्स-रे की सुविधा होनी चाहिए। इस सुविधा से भी मरीज वंचित हैं। सीएचसी प्रभारी का कहना है खून की कई जांचें की जाती है।
रात को भर्ती नहीं किए जाते सीएचसी में मरीज
सीएचसी प्रभारी भले कहें कि मरीज भर्ती किए जाते हैं लेकिन मरीज दिन में ही भर्ती किए हुए दिखते हैं। शाम होने से पहले मरीजों को उनके घर के लिए रवाना कर दिया जाता है। रात के समय तो घायल को भी उपचार नहीं मिल पाता। ऐसा अक्सर होता है जब घायल असमोली क्षेत्र में हुआ लेकिन उपचार जिला अस्पताल में होता है। इसका यही कारण हैं कि संसाधन पर्याप्त नहीं है।
सीएचसी से नहीं मिल पा रहा मरीजों को लाभ
असमोली सीएचसी क्षेत्र में 100 से ज्यादा गांव के लोग दवाई लेने के लिए आते हैं। लेकिन सीएचसी का लाभ ग्रामीण इलाके के मरीजों को पूरी तरह मिल नहीं पा रहा है। गांव रामनगर निवासी तसलीम ने बताया कि वह खून की जांच कराने के लिए आया था लेकिन की नहीं गई। इसी तरह गांव ऐंचोड़ा कंबोह निवासी जुबैदा ने बताया कि उसको बुखार आ रहा है। सीएचसी में ड्रिप तो लगाई लेकिन खून की जांच नहीं की गई।
हेपेटाइटिस-सी की दवाई जिला अस्पताल से मरीज लेने जाते हैं। एक्स-रे की भी सुविधा नहीं है। इसलिए मरीजों को जिला अस्पताल रेफर करना पड़ता है। इमरजेंसी सेवाएं पूरी तरह चालू रहती हैं। मरीज भी भर्ती किए जाते हैं। -संदीप सिंह, प्रभारी, सीएचसी असमोली