संवाद न्यूज एजेंसी
संभल। तहसील के गांव अल्लीपुर में स्थित अमरपति खेड़ा एएसआई के रिकॉर्ड में तो दर्ज है लेकिन मौके पर अवैध पट्टे हो चुके हैं और लोग उसमें खेती कर रहे हैं। एएसआई भी संरक्षित कर भूल गया और अब मौके पर अमरपति खेड़ा के निशान तक मिट गए हैं। कुछ समय पहले हुई खोदाई के दौरान प्राचीन सिक्के मिले थे और कुछ हड्डी मिली थीं। ग्रामीणों का दावा है कि वर्ष 2009 में एक 10 फीट ऊंचाई का कंकाल मिला था। जो बाद में लोगों ने नष्ट कर दिया था।
एएसआई की टीम बुधवार को इस स्मारक पर पहुंची थी। जब मौके पर अवैध कब्जे देखे तो प्रशासन को सूचना दी। इसी क्रम में बृहस्पतिवार को एसडीएम वंदना मिश्रा मौके पर पहुंची और मौके की पैमाइश कराने की बात कही है।
एसडीएम ने बताया है कि अमरपति खेड़ा 1920 से एएसआई संरक्षित है। ग्रामीणों ने बताया है कि 21 समाधियां इस स्थान पर होती थी। गुरु अमर की समाधि भी इसी स्थान पर थी जो राजा पृथ्वीराज चौहान के समकक्ष माने जाते थे। ग्रामीणों ने 1834 या उसके बाद के सिक्के भी दिखाए हैं जो समय-समय पर हुई खोदाई के दौरान मिले हैं। एएसआई टीम को जो भी सहयोग चाहिए वह दिया जाएगा। वहीं, दूसरी ओर गांव अल्लीपुर के निवासी मनोज राणा ने बताया कि एएसआई संरक्षित स्मारक रिकॉर्ड में तो दर्ज है लेकिन मौके पर कुछ नहीं है। समय-समय पर हुई खोदाई के दौरान तमाम प्राचीन वस्तुएं निकलकर बाहर आई हैं। इसके बाद भी एएसआई की टीम ने सुध नहीं ली।
एएसआई संरक्षित स्मारक देखभाल के अभाव से जूझ रहे हैं
जिले में एएसआई संरक्षित सात स्मारक हैं। इसमें संभल की जामा मस्जिद, सौंधन का किला, फिरोजपुर का किला, चंद्रेश्वर तीर्थ, बेरनी मंदिर, गुमथल और अमरपति खेड़ा शामिल हैं। छह स्मारकों का जिक्र एएसआई द्वारा समय-समय पर किया जाता रहा है लेकिन बुधवार से ही सातवां स्मारक होने की जानकारी एएसआई द्वारा दी गई है। जो स्मारक जिले में है उन सभी की देखभाल का अभाव है। सौंधन किले के आसपास अतिक्रमण है। इसी तरह फिरोजपुर किले की स्थिति है। चंद्रेश्वर तीर्थ और अमरपति खेड़ा की जमीनों पर अवैध पट्टे कर दिए गए हैं। देखभाल का अभाव स्पष्ट नजर आता है।
कोट
एएसआई संरक्षित स्मारकों की अच्छी देखभाल के लिए पत्राचार किया जा चुका है। अमरपति खेड़ा भी एएसआई संरक्षित होने की जानकारी मिली है। अमरपति खेड़ा की मौके पर क्या स्थिति है। इसकी जानकारी कराई जाएगी। एएसआई को प्रशासन का जो सहयोग चाहिए होगा वह दिया जाएगा।
डॉ. राजेंद्र पैंसिया, डीएम, संभल।