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भगवान गणेश का तीर लगते ही जल उठा नरांतक राक्षस का पुतला

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As soon as the arrow of Lord Ganesha hit, the effigy of the demon Narantak got burnt.
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गणेश चतुर्थी मेले में बृहस्पतिवार को नरांतक राक्षस वध का आयोजन किया गया। जिसमें हीरा लाल भगवान गणेश के स्वरूप में सजधज कर गणेश मंदिर से रथ पर सवार होकर मेला ग्राउंड पहुंचे। यहां नरांतक के पुतले का गणेश जी ने वाण चलाकर वध कर दिया। इसके बाद मौजूद श्रद्धालुओं ने गणपति बप्पा मोरया व मंगल मूर्ति मोरया के जयकारे लगाए।
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उत्तर भारत का प्रसिद्ध गणेश चतुर्थी मेले का आयोजन चंदौसी में किया जा रहा है। शुक्रवार को अक्षय तृतीय पर भगवान गजानन विदा लेंगे। बृहस्पतिवार को मेले में नरांतक वध का आयोजन किया गया। जिसमें ब्रह्म बाजार निवासी मिष्ठान विक्रेता हीरा लाल ने गणेश स्वरूप में सजधज कर गणेश मंदिर में भक्तों को आशीर्वाद दिया। इस दौरान उनकी आरती भी उतारी गई। इसके बाद विशाल रथ पर गणेश भगवान हाथों में धनुष वाण लेकर नरांतक राक्षस से युद्ध लड़ने के लिए गाजे-बाजे के साथ मेला ग्राउंड के चल पड़े। इस दौरान श्रद्धालु भी नाचते-गाते चल रहे थे। मेला ग्राउंड में एक स्थान पर नरांतक का पुतला बनाया गया था। इसके पास पहुंचकर गणेश जी ने अपने धनुष से वाण छोड़कर नरांतक राक्षस का वध कर दिया और वाण लगते ही पुतला धू-धूकर कर जल उठा। तभी श्रद्धालुओं ने गणपति बप्पा मोरया, मंगल मूर्ति मोरया के जयकारे लगाने प्रारंभ कर दिए।
बताते कि हीरा लाल पिछले 17 वर्षों से भागवान गणेश का स्वरूप लेते चले आ रहे हैं। इससे पहले उनके पिता ज्योति लाल इस कार्य करते थे। इस अवसर पर हरिगोपाल वार्ष्णेय, विनय सराफ, ललित किशोर, सुधीर गुप्ता, रविंद्र कुमार, मनोज कुमार, शुभम अग्रवाल, राजीव कुमार, प्रजीत लालू, सतेंद्र मामा आदि मौजूद रहे।

As soon as the arrow of Lord Ganesha hit, the effigy of the demon Narantak got burnt.

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