समाजसेवी अन्ना हजारे ने भीड़ के बीच अपने जीवन के अनुभव साझा किए। उन्होंने न सिर्फ आनंद का राज बताया बल्कि भौतिक साधनों के लिए भागदौड़ कर रहे मौजूद लोगों को खुशियों भरे जीवन की प्रेरणा भी दी। अन्ना हजारे ने साफ कहा कि वह मृत्यु से नहीं डरते।
समाज और देश की सेवा करने का निर्णय ले लिया है। समाजसेवी अन्ना हजारे ने कहा कि मैं 25 साल का युवक था। सोच में बैठा था। सोचा कि सब लोग दौड़ रहे हैं। सुबह 4 बजे उठते हैं और रात 10 बजे तक दौड़ते हैं। पर हाथ में कुछ नहीं।
एक रात में मैंने सोचा भागदौड़ और परेशानी भरी जिंदगी से आत्महत्या ठीक है। आत्म हत्या करनी है। लेकिन तभी स्वामी विवेकानंद और महात्मा गांधी की किताबें मेरे हाथ में आई। स्वामी विवेकानंद की किताब से प्रेरणा मिली तो समझ में आया। भगवान ने मनुष्य का जीवन सेवा के लिए दिया है। मैंने भी निर्णय ले लिया कि पूरा जीवन गांव, समाज और देश की सेवा के लिए अर्पण रहेगा। पहले तो खतरा लगा।
पहले सोचा कि शादी कर लूं तो चूल्हा जलाने में समय बीत जाएगा। इसलिए शादी नहीं करने का निर्णय लिया। आज मेरी उम्र 80 साल हो गई और वही विचार है। जो 25 वर्ष की उम्र में था। उन्होंने बताया कि 45 साल से घर में नहीं गया। करोड़ों रुपये के अवार्ड मिले। उसका भी ट्रस्ट बना दिया। 12-13 लाख रुपये का ब्याज आता है। लेकिन उसे भी लोगों की सेवा में लगा देता हूं।
अपने पास नहीं रखता। एक मंदिर में रहता हूं। सामान के नाम पर मेरे पास सिर्फ एक बिस्तर है और खाने की प्लेट। आनंद आता है। लखपति-करोड़पति को भी नहीं मिलता होगा वो आनंद मुझे मिलता है। सही आनंद के लिए दूसरों को सुखी करो। इसलिए मैंने प्रण लिया कि जब तक जीऊंगा समाज और देश की सेवा करूंगा। बोले-मृत्यु हथेली पर ली है। मृत्यु का भय नहीं है।