चंदौसी। चैक बाउंस के मामले में न्यायालय ने एक आरोपी को छह माह की सजा सुनाया और साढ़े नौ लाख रुपये का जुर्माना लगाया। मुकदमे की सुनवाई सिविल जज जूनियर डिवीजन न्यायिक मजिस्ट्रेट अक्षिता मिश्रा के न्यायालय में हुई। कोतवाली चंदौसी क्षेत्र के गांव अकबरपुर चितौरी के रहने वाले शिशुपाल पुत्र माधो सिंह ने एक परिवाद धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम के तहत गांव के ही रहने वाले राजवीर पुत्र सूरज सिंह के विरुद्ध किया था। जिसमें शिशुपाल ने बताया कि अभियुक्त राजवीर की एक वारदाना फर्म बहजोई बाईपास रोड पर है। एक ही गांव के होने से दोनों के बीच अच्छी जान पहचान हो गई। शिकायत कर्ता ने अपनी पत्नी के नाम की जमीन को बेचा था। जिसका आठ लाख रुपया उसके पास था। आरोपी ने उक्त आठ लाख रुपये फर्म में पार्टनर बनाने के लिए व्यवसाय में लगवा लिए लेकिन उसे लिखा पढ़ी में पार्टनर नहीं बनाया। शिकायत कर्ता ने लगातार आरोपी से रुपये वापस करने की मांग की तो उसने स्टेट बैंक का एक चैक दे दिया। जब शिकायत कर्ता ने बैंक में चैक लगाया तो बैंक ने खाते में पर्याप्त धनराशि न होने का हवाला देते हुए चैक बाउंस कर दिया। शिकायत कर्ता ने आरोपी से रुपये वापस मांगे तो रुपये वापस नहीं दिए। जिससे शिकायत कर्ता ने न्यायालय में चैक बाउंस का मुकदमा दायर कर दिया। इस मुकदमे की सुनवाई सिविल जज जूनियर डिवीजन न्यायिक मजिस्ट्रेट अक्षिता मिश्रा के न्यायालय में हुई। जहां से आरोपी को चैक बाउंस का दोषी पाते हुए छह माह का कारावास व 950, 000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। जिसमें से 940, 000 रुपये शिकायत कर्ता को क्षतिपूर्ति के रूप में अदा किए जाएंगे तथा 10, 000 रुपये सरकार के खाते में जमा होंगे। आरोपी कारावास की अवधि व्यतीत भी कर लेता है। फिर भी अर्थदंड की धनराशि उसकी संपत्ति से वसूल की जाएगी।