कई नेताओं ने प्रतिक्रिया देने से पहले किनारा किया। बाद में प्रतिक्रिया दी। अधिकतर लोगों का ध्यान टीवी की खबरों पर था। आगे क्या होगा। इस पर आपस में चर्चा हो रही थी।
सपा के जिला कार्यालय पर प्रतिक्रिया देने के लिए कोई नेता उपलब्ध नहीं था। जिलाध्यक्ष फिरोज खां पहले ही लखनऊ पहुंच चुके हैं जबकि कैबिनेट मंत्री नवाब इकबाल महमूद भी लखनऊ में हैं। सपा कार्यालय पर सन्नाटा था और किले के नाम से मशहूर कैबिनेट मंत्री के निवास पर कोई भीड़-भाड़ नहीं थी। किले में कुर्सियां खाली थीं। इसकी वजह यह थी कि न तो कैबिनेट मंत्री थे और न ही उनके बेटे सपा नेता सुहेल इकबाल। कार्यकर्ता भी नजर नहीं आए। मंत्री समर्थकों और सपा के पदाधिकारियों से जब लखनऊ के सियासी घटनाक्रम पर बातचीत की गई तो उन्होंने प्रतिक्रिया देने से परहेज किया। जबकि असमोली क्षेत्र के सपा कार्यकर्ता गुल्लू यादव ने सब कुछ ठीक हो जाने की उम्मीद जताई। उनका कहना था कि तीन दिन में सब कुछ ठीक हो जाएगा।
सपाइयों ने अमर सिंह का पुतला फूंका
संभल। सपा के महासचिव अमर सिंह के खिलाफ संभल में गुस्सा फूट पड़ा। जैसे ही मुख्यमंत्री को सपा से निष्कासित करने की खबर टीवी पर आई तो कार्यकर्ता मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जिंदाबाद के नारे लगाते हुए सड़क पर उतर आए। कार्यकर्ताओं ने अमर सिंह का पुतला फूंका। इसका नेतृत्व सपा के जिला सचिव सईद अख्तर इसराईली ने किया। उन्होंने सपा के वर्तमान घटनाक्रम के लिए अमर सिंह को जिम्मेदार ठहराया। यदि अमर सिंह को सपा से निकाल दिया जाए तो पार्टी ठीक हो जाएगी। इस दौरान बिट्टू वारसी, ताहिर तुर्की, इमरान इसराईली, फहीम जाहिद अंसारी, आसिफ अंसारी, धीरज आर्य, राहुल शर्मा, मेंबर जफर, कदीर, अजय यादव समेत कई कार्यकर्ता थे।
बोले पार्टियों के जिलाध्यक्ष ः घड़ा भर गया है
सपा के पाप का घड़ा भरकर फूट गया है। इसीलिए सपा में अब आपसी रार चल रही है। आगामी विधानसभा चुनाव में जनता सपा को माफ नहीं करेगी। भाजपा पूर्ण बहुमत से सरकार बनाएगी। - राजेश सिंघल, भाजपा के जिलाध्यक्ष।
यह समाजवादी पार्टी का विवाद है। इससे कांग्रेस को कोई लेना देना नहीं है। मेरी नजर में पीढ़ियों की सोच में जो अंतर होता है वही अंतर टकराव की वजह बना है। - विमलेश कुमारी, कांग्रेस की जिलाध्यक्ष।
सपा की सरकार में पांच वर्ष तक कानून व्यवस्था नहीं रही। जनता परेशान थी। इन्हें पता है कि अब दोबारा सरकार नहीं आएगी। इसलिए एक-दूसरे जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। - धर्मेंद्र कुमार, बसपा के जिलाध्यक्ष।
कुछ कतराए, कुछ बोले दिग्गज
प्रोफेसर रामगोपाल यादव और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का निष्कासन पूरी तरह से असंवैधानिक है। पूरी पार्टी मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ है। एक जनवरी को बुलाए गए आपातकालीन राष्ट्रीय अधिवेशन में आगे की रणनीति पर फैसला हो जाएगा। -जावेद अली खां, राज्यसभा सदस्य।
इससे पहले भी कई नेता और विधायक पार्टी से निकाले गए हैं लेकिन सब के सब वापस आ गए। मैं लखनऊ में हूं और दिन में मुख्यमंत्री से मिली थी। मुझे लगता है कि नेता अपना फैसला वापस लेेंगे और सीएम अखिलेश यादव फिर से पार्टी में होंगे। - लक्ष्मी गौतम, विधायक, चंदौसी।
संभल जिले के सियासी दिग्गज लखनऊ पहुंचें
संभल। सपा के जिलाध्यक्ष फिरोज खां ने बताया कि तेजी से बदलते घटनाक्रम के बीच मुलायम सिंह यादव ने लखनऊ में उम्मीदवारों की बैठक बुलाई है। बैठक में शामिल होने के लिए पिंकी यादव शुक्रवार की रात रवाना हुईं हैं जबकि नवाब इकबाल महमूद और रामखिलाड़ी यादव पहले से लखनऊ में हैं। बिलारी से जियाउर्रहमान बर्क भी लखनऊ पहुंच गए हैं। श्रीपाल दिवाकर चंदौसी के उम्मीदवार हैं वे भी शनिवार को सुबह तक लखनऊ पहुंच जाएंगे।
मैंने टीवी पर पूरा सियासी घटनाक्रम देखा है पर अभी कोई राय नहीं दूंगा। 24 घंटे इंतजार करिए। हम अपनी राय बताएंगे लेकिन फिलहाल तो कुछ बोलने की स्थिति नहीं है। - रामखिलाड़ी यादव, विधायक गुन्नौर।
पार्टी बिखराव की ओर है ये तकलीफ की बात है। बहरहाल इसी में हमें अपना रास्ता चुनने की जरूरत है। हमारी राय तो अखिलेश के साथ्ा है। क्योंकि आम जनता अखिलेश्ा के साथ है और हम अपनी जनता के साथ हैं। इसलिए मुख्यमंत्री का ही साथ देंगे। - नवाब इकबाल महमूद, खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के मंत्री।
मंत्री कमाल अख्तर पास तो विधायक चंद्रा हुए बाईपास
अमरोहा। समाजवादी पार्टी में विधानसभा-2017 के चुनाव से पहले दो सामानान्तर सूचियों के जारी होने से कार्यकर्ताओं में असमंजस और खलबली की स्थिति हैं, वहीं एक के बाद एक आईं दोनों सूचियां मंत्रियों और विधायकों के बारे में नई चर्चाओं और धारणाओं को जन्म दे रही हैं। जिले के हसनपुर से विधायक और कैबिनेट मंत्री कमाल अख्तर ने जहां सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव दोनों की सूचियों में स्थान पाकर पार्टी में अपनी मजबूत पकड़ को दिखाया है। वहीं, मंडी धनौरा विधायक एम चंद्रा ने दोनों ही सूचियों से गायब होकर जनता के बीच अपनी निष्क्रियता की शिकायतों को और आधार दिया है।
टिकट वितरण और पार्टी के फैसलों में अपनी अनदेखी से आहत मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपनी ही पार्टी के खिलाफ बगावत के एलान करते पार्टी से इतर अपने समर्थक विधायक और मंत्रियों को शामिल करते हुए प्रत्याशियों की नई सूची जारी कर दी। मुलायम के बाद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की ओर से जारी की गई उम्मीदवारों की दूसरी सूची ने जहां पहले घोषित प्रत्याशियों की बेचैनी बढ़ा दी है। वहीं पार्टी के कार्यकर्ता एक प्रत्याशी के सामने उसी पार्टी का दूसरा उम्मीदवार आने से हैरत में है। एक पार्टी की दो उम्मीदवारों को लेकर मतदाता भी सकते में हैं।
कैबिनेट मंत्री महबूब अली खुद के टिकट के साथ नौगावां सादात विस सीट से उनके करीबी हाजी इकरार अंसारी और धनौरा सुरक्षित सीट से उर्वशी का टिकट पाने में कामयाब रहे। पहली सूची में हसनपुर से कैबिनेटमंत्री कमाल अख्तर का नाम नहीं होने और उनका टिकट कटने की चर्चाएं तेज हुईं। ये भी बातें होने लगी की सीएम से नजदीकी के कारण उनको भी कीमत चुकानी पड़ी।गुरुवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव की ओर से सूचियां जारी हुई इन चर्चाओं ने एकदम से पलटी मार ली।
मुख्यमंत्री और शिवपाल यादव की दोनों की ही सूचियों में हसनपुर से स्थान पाकर कैबिनेट मंत्री कमाल अख्तर ने सीएम और संगठन से अपनी नजदीकी को तो साबित ही किया, ये भी बता दिया कि हसनपुर सीट से उनका कोई विकल्प नहीं है। दोनों सूची में स्थान पाने से पार्टी में उनकी मजबूत पकड़ को लेकर भी चर्चाओं का बाजार गर्म है। मंडी धनौरा विधायक एम चंद्रा ने दोनों ही सूचियों से गायब होकर जनता के बीच अपनी निष्क्रियता की शिकायतों को और आधार दिया है।