चंदौसी। जिले में फिर एक बार कृषि विभाग मिट्टी की जांच शुरू कर रहा है। जिससे पता चल सके कि जमीन में किस पोषक तत्व की कमी है। जिसके बाद किसानों को मिट्टी की रिपोर्ट कार्ड उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि किसान मिट्टी का उपचार कर सके। जागरूकता के अभाव में अधिकांश किसानों को यह नहीं पता होता कि उनकी जमीन में किस पोषक तत्व की कमी है। उत्पादन प्रभावित होने पर वे अंधाधुंध यूरिया और डीएपी का प्रयोग करने लगते हैैं। जिससे मिट्टी की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने लगती है।
कृषि विभाग को मिट्टी की निशुल्क जांच करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए जिले के आठ ब्लॉकों के 80 गांव चिह्नित किए गए हैं। प्रत्येक गांव से 100 किसानों का चयन किया गया है। इनके खेतों की मिट्टी की जांच चंदौसी, संभल और गुन्नौर की प्रयोगशाला में निशुल्क की जाएगी। मिट्टी की जांच पूरी होने के बाद किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड भी दिया जाएगा। इसमें मिट्टी की सेहत का पूरा ब्योरा अंकित रहेगा। इस कार्ड से जानकारी लेकर ही मिट्टी के पोषक तत्वों की कमी दूर की जा सकेगी। खरीफ की बुआई से पहले जांच कर किसानों को मृदा कार्ड उपलब्ध कराए जाएंगे। ताकि किसान मिट्टी का सही उपचार कर सके।
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मिट्टी में इन तत्वों की होती है जांच
मिट्टी में जिन तत्वों की जांच की जाती है, उनमें नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश, कैल्शियम, मैग्नीशियम, सल्फर, जिंक, लोहा, तांबा, मैंगनीज, बोरॉन प्रमुख हैं।
जिले में कृषि विभाग जनवरी माह में 4800 नमूनों की जांच कर चुका है। यह नमूने आठ ब्लॉकों के 48 गांव से लिए गए थे। जांच में अधिकांश मिट्टी में जीवाश्म कार्बन की कमी पाई गई है। स्वस्थ मिट्टी में जीवाश्म कार्बन 0.80 पीपीएम से अधिक होना चाहिए। लेकिन यह केवल 0.21 पीपीएम है। वहीं मिट्टी में जीवाश्म कार्बन के अलावा सूक्ष्म तत्व जिंक और सल्फर की कमी है।