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Sambhal News: लाखों खर्च के बाद निस्तारण केंद्र हुए कबाड़, सड़कों पर कूड़ा

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संभल। शहरों की तरह गांवों में भी कूड़े का निस्तारण हो सके। इसके लिए शासन ने करोड़ों रुपये का बजट खर्च कर दिया। कूड़ा निस्तारण केंद्र बनाए गए लेकिन इन कूड़ा निस्तारण केंद्रों पर खर्च हुए धन का कूड़ा हो चुका है। केंद्रों पर तो कूड़े का निस्तारण नहीं हो रहा लेकिन सड़कों पर जलाकर कूड़ा निस्तारण किया जा रहा है। कूड़ा जलने से प्रदूषण भी फैल रहा है और लापरवाही भी उजागर हो रही है। मंगलवार को कूड़ा निस्तारण केंद्रों की पड़ताल करने पर अलग-अलग तस्वीर सामने आई हैं। डीपीआरओ चेतेंद्र पाल सिंह ने बताया कि लोगों में जागरूकता नहीं है। कूड़ा निस्तारण के लिए केयरटेकर तैनात हैं लेकिन लोग एक रुपये प्रतिदिन यानी 30 रुपये मासिक भी अदा नहीं कर रहे। इसलिए कई ग्राम पंचायतों में केयरटेकर नहीं है। अब सवाल उठता है कि एक केंद्र के निर्माण में कई लाख रुपये खर्च हो चुके हैं तो ग्राम पंचायत अपने स्तर से कर्मचारी लगाकर कूड़े का निस्तारण क्यों नहीं कर रही। गांव में सफाई कर्मचारी की भी तैनाती है। उसको इस काम में क्यों नहीं लगाया जा रहा।
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शहजादी सराय : केंद्र पर ताला और बाहर जलता मिला कूड़ा
संभल ब्लॉक के गांव शहजादी सराय में कूड़ा निस्तारण केंद्र पर ताला लगा मिला। केंद्र के बाहर बड़ी मात्रा में कूड़ा पड़ा हुआ था और जल रहा था। जिससे खतरनाक धुआं उठने के कारण प्रदूषण फैल रहा था। केंद्र के अंदर एक वाहन खड़ा हुआ दिखा। वहीं गांव बराही में कूड़ा निस्तारण केंद्र में कूड़ा भरा हुआ है। केंद्र के बाहर भी कूड़े के ढेर लगे हैं। गांव रजाकपुर में कूड़ा निस्तारण केंद्र पर ताला लगा लगा दिखा। अपशिष्ट पदार्थ अंदर अलग अलग पड़े मिले। गांव मुकरर्बपुर में कूड़ा केंद्र के बाहर कूड़ा पड़ा था जबकि केंद्र पर ताला लटका था।

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सैफ खां सराय : केंद्र बंद और सड़क के किनारे पड़ा कूड़ा
पवांसा ब्लॉक क्षेत्र के गांव सैफ खां सराय में स्थित ठोस एवं अपशिष्ट केंद्र बंद मिला। केंद्र के अंदर कुछ कूड़ा बिखरा पड़ा था। आसपास के लोगों ने बताया कि बहुत समय पहले इसमें कुछ कूड़ा डाला गया था। अब कोई कूड़ा नहीं डालता है। इस कूड़ा निस्तारण केंद्र के सामने चंदौसी मार्ग किनारे कूड़े बड़े ढेर लगे दिखाई दिए। लोगों ने बताया कि इस कूड़े से दुर्गंध उठती है और लोगों को मुश्किल का सामना करना पड़ता है। कूड़ा निस्तारण केंद्र तो नाम के लिए बना है।
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ओबरी : केंद्र पर ताला और बदहाल स्थिति
असमोली ब्लॉक के गांव ओबरी में स्थित कूड़ा निस्तारण केंद्र पर ताला लटका मिला। परिसर में घास उग रही है। वहीं गांव में अंबेडकर पार्क पर गंदगी, कूड़े के ढेर लगे हैं। इसी तरह दूसरी कई ग्राम पंचायतों में निस्तारण केंद्र पर स्थिति बेहतर नहीं दिखी। ग्रामीणों ने बताया कि लाखों रुपये केंद्र के निर्माण में खर्च कर दिए और इसका कोई उपयोग नहीं है।
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पवांसा क्षेत्र के गांवों में केंद्रों की हालत खस्ता
पवांसा ब्लॉक के गांव मऊभूढ़ में कूड़ा निस्तारण केंद्र पर कूड़ा कलेक्शन का कार्य बंद है। परिसर में गंदगी फैली है। गांव के मुख्य मार्ग पर कूड़े के ढेर लगे हैं। गांव शेरपुर में केंद्र के मुख्य गेट पर ग्रामीणों के कृषि यंत्र खड़े हैं। कूड़ा कलेक्शन का कार्य नहीं हो रहा है। गांव बसला में केंद्र का निर्माण होने के बाद से ही मुख्य गेट पर ताला लगा है। गांव शकरपुर में केंद्र के परिसर में घास खड़ी है। कूड़े से संंबंधित कार्य नहीं हो रहा है। ऐसी ही स्थिति गांव चाचू नागल में केंद्र की है।
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केंद्र के निर्माण में लाखों रुपये खर्च कर दिए गए लेकिन आबादी के बीच जगह जगह कूड़े के ढेर मौजूद हैं। अंबेडकर पार्क पर भी गंदगी के अंबार लगा है। ऐसे में स्वच्छता का माहौल कैसे बनेगा। फिरासत हुसैन, ओबरी
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ग्राम पंचायत के मजरा चपतियों की मढैया में 31.65 लाख रुपये खर्च होने के बाद घर-घर से कूड़ा कलेक्शन का कार्य नहीं हो रहा है। गांव के मुख्य मार्ग पर कूड़े के ढेर लगे हैं। महेंद्र सिंह गांव मुजफ्फरपुर
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लाखों रुपये से कूड़ा निस्तारण केंद्र का निर्माण कराया गया। रुपये खर्च होने के बाद भी कूड़ा कलेक्शन का कार्य नहीं हो रहा है। स्वच्छता को लेकर कोई चिंता का माहौल नहीं है। ठाकुर सिंह, चाचू नागल
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.केंद्र बनने के बाद ई-रिक्शा भी कूड़ा कलेक्शन के लिए आ गया है मगर कूड़ा कलेक्शन का कार्य नहीं हो रहा। लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी केंद्र शोपीस बना है।
-शंकर सिंह आर्य, खिरनी मोहिउद्दीनपुर
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केंद्र का निर्माण होने के बाद से ही मुख्य गेट में ताला लगा हुआ है। पूर्व में तेज आंधी में केंद्र की टीनशेड भी उड़ गई थी। कूड़ा कलेक्शन का कार्य नहीं हो रहा है।
-अशोक कुमार, बसला
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कूड़ा कलेक्शन के लिए केयरटेकर रखा जाता है। गांव का प्रत्येक परिवार 30 रुपये मासिक अदा करता है तो उससे केयरटेकर का मानदेय जाता है लेकिन कई ग्राम पंचायतों में कूड़ा कलेक्शन के मासिक 30 रुपये परिवारों ने नहीं दिए। जिस कारण केयरटेकर भी नहीं है। हम प्रयास कर रहे हैं कि सफाई कर्मचारी ही व्यवस्था को संभाल लें।
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-चेतेंद्र पाल सिंह, डीपीआरओ, संभल
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