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‘अब नेताजी को किसी को रखने-निकालने का हक नहीं’

Tue, 03 Jan 2017 12:17 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, संभल
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समाजवादी पार्टी - फोटो : अमर उजाला
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लखनऊ की सियासी गहमा गहमी दिल्ली पहुंच गई। जिले के सियासी दिग्गज अखिलेश यादव के साथ हैं। राज्यसभा सदस्य जावेद अली खां ने खुलकर अखिलेश यादव की पैरवी की है। कैबिनेट मंत्री नवाब इकबाल महमूद भी अखिलेश यादव के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। इस बीच जिले के सियासी दिग्गज भी लखनऊ से दिल्ली पहुंच चुके हैं। दिल्ली में मौजूद राज्यसभा के सदस्य जावेद अली खां ने एक सवाल के जवाब में कहा कि पार्टी में किसी को रखने और निकालने का हक अब मुलायम सिंह यादव के पास नहीं है। क्योंकि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव हैं।
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उन्होंने कहा कि पार्टी के राष्ट्रीय अधिवेशन में मुलायम सिंह यादव को सर्व सम्मति से संरक्षक बनाया गया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव चुने गए हैं। किसी को पार्टी में लेने और निकालने का हक अब मुलायम सिंह यादव को नहीं है। यह काम राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का है। हां पार्टी में मुलायम सिंह यादव का दर्जा अभिभावक और संरक्षक की तरह रहेगा। पार्टी में छिड़े घमासान पर उन्होंने, शिवपाल यादव पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि जो लोग पार्टी के चुनाव निशान को ताबीज समझ कर दावेदारी कर रहे हैं उन्हें एक बात जान लेना चाहिए कि पार्टी लोगों से बनती है। लोग अखिलेश यादव के साथ हैं।   


उन्होंने कहा कि दो-ढाई महीने से जो कुछ भी चल रहा था वो अच्छा नहीं था। पार्टी में डेमोक्रेसी को खत्म करके शिवपाल यादव, नेता जी का नाम लेकर पार्टी के वफादारों और बड़े नेताओं को भी हैसियत बताया करते थे। अब हैसियत बताने वालों को खुद की हैसियत पता लग गई होगी। पार्टी के 200 से ज्यादा विधायक, सभी सांसद, पदाधिकारी तथा कार्यकर्ताओं के साथ आम जनता पूरी तरह से मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ है। पार्टी के अधिवेशन में उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना जा चुका है।
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मुलायम सिंह यादव पार्टी के संरक्षक हैं और अभिभावक हैं। उनका सम्मान पार्टी में है आगे भी बना रहेगा। जहां तक पार्टी के चुनाव चिह्न का सवाल है। जहां पार्टी का बहुमत है, चुनाव चिह्न भी वहीं रहेगा लेकिन कुछ लोग पार्टी के चुनाव चिह्न को ताबीज समझकर दावेदारी कर रहे हैं। ऐसे लोगों पर मैं क्या कमेंट करूं। लोगों का समूह जब एक विचारधारा के साथ संगठित होता है तब राजनीतिक पार्टी बनती है। इस समाजवादी विचारधारा के लोगों का समूह अखिलेश यादव के साथ पार्टी बनकर खड़ा हुआ है।

अखिलेश खेमे की फ्लैक्स से पहले ही गायब हो गए थे चाचा शिवपाल
संभल (ब्यूरो)। अब सपा लगभग पूरी तरह से अखिलेश मय हो चुकी है। लेकिन शिवपाल का रंग अखिलेश खेमे से पहले ही उतर चुका था। नए वर्ष की शुभकामनाओं की जो फ्लैक्स कार्यकर्ताओं ने लगाएं हैं उनमें शिवपाल यादव नदारद हैं, जबकि प्रोफेसर रामगोपाल का फोटो पहले की ही तरह अब भी मौजूद हैं। 


संभल के अमूमन हर फ्लैक्स पर एक जनवरी से पहले प्रदेश अध्यक्ष रहे शिवपाल सिंह का फोटो मुलायम सिंह यादव के बाद प्रमुखता से लगाया जाता था। लेकिन रविवार को लखनऊ में हुई रैली के बाद जैसे ही अखिलेश यादव को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित किया गया, कार्यकर्ताओं की खुशी का ठिकाना न रहा। कार्यकर्ताओं ने हाथो हाथ नए साल और अखिलेश यादव के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने की शुभकामनाओं के फ्लैक्स छपवाकर लटका दिए। उन्होंने शिवपाल यादव का फोटो हटाने में जरा भी देर नहीं की। जबकि प्रोफेसर रामगोपाल यादव को सपा से निष्कासित किए जाने के बाद भी फ्लैक्स पर से कार्यकर्ताओं ने उनके फोटो नहीं हटाए थे।

दिग्गजों का लखनऊ से लौटना का इंतजार कर रहे हैं समर्थक
संभल। लखनऊ के सियासी घटनाक्रम से संभल की राजनीति में गहमागहमी बनी हुई है। पार्टी के अंदर चल रहे घमासान पर हर किसी की नजर बनी हुई है। सोमवार को भी लोग लखनऊ की पल-पल की खबर लेने के लिए टीवी से चिपके रहे। साथ ही संभल के दिग्गजों से लखनऊ की जानकारी ली। इस समय संभल के सभी दिग्गज लखनऊ में हैं और समर्थक उनके आने का इंतजार कर रहे हैं। 


सपा का सियासी घमासान रुकने का नाम नहीं ले रहा है। जो भी घमासान लखनऊ में चल रहा है। उसे लेकर परेशानी संभल तक नजर आ रही है। भले ही सपा के अधिकांश दिग्गज मुख्यमंत्री के पाले में हो लेकिन यह भी नकारा नहीं जा सकता कि संभल के लोग मुलायम सिंह को भी बहुत चाहते हैं। क्योंकि मुलायम सिंह यादव का संभल से पुराना रिश्ता है और वह यहां से सांसद भी रहे हैं। ऐसे में सभी पार्टी के अंदर चल रहे घमासान को खत्म होते देखना चाहते हैं। 
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