जुनावई (संभल)। जलस्तर घटने के बाद गांवों में भरा गंगा का पानी कम होने लगा है लेकिन इसके बावजूद लोगों की दुश्वारियां बरकरार हैं। बांध के अंदर किसानों की मुसीबत कम होने का नाम नहीं ले रही है। खेतों में कई दिनों से पानी भरा होने पर फसलें बर्बादी की कगार पर हैं। साथ ही कटान की वजह से कई किसानों की फसलें गंगा में समा गई हैं।
गांव बझांगी निवासी मुनेंद्र कुमार यादव और छत्रपाल सिंह ने बताया कि गांव के प्रेमपाल और सोनपाल सिंह ने करीब डेढ़ साल पहले 20 बीघा में यूकेलिप्ट्स की बगिया लगाई थी। पौधों की सुरक्षा के लिए करीब डेढ़ लाख रुपये का जाल और 60 हजार रुपये रोपण पर खर्च किए थे। अब गंगा के लगातार कटान से खेत का बड़ा हिस्सा कटकर नदी में समा गया और पूरी 20 बीघा बगिया तेज बहाव में बह गई।
वहीं बझांगी निवासी राजेश कुमार, नवाब सिंह और उदिया नगला निवासी छोटे सहित कई किसानों की गन्ने की फसल भी कटान की चपेट में आकर बह गई। किसानों का कहना है कि बाढ़ ने उनकी मेहनत और लागत दोनों बर्बाद कर दी है।
गांवों में अभी भी भरा है पानी
रघुपुर पुख्ता गांव के रास्तों और स्कूल के पीछे अब भी गंगा का पानी भरा है। उदिया नगला और बझांगी के बीच रास्ते में कीचड़ और जलभराव से आवागमन पूरी तरह बंद है। ग्रामीणों को पानी से होकर या दूसरे रास्तों से आना-जाना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि गंगा अभी भी तेज बहाव के साथ कटान कर रही है। किसानों ने प्रशासन से मौके पर आकर सर्वे कराने और मुआवजा दिलाने की मांग की है।
वर्जन
अभी कहीं भी कटान की सूचना नहीं मिली है। हालांकि हर स्तर पर निगरानी रखी जा रही है। गंगा के पानी से खराब या नष्ट हुई फसलों का सर्वे कराकर संबंधित किसानों को उचित मुआवजा दिलाया जाएगा। -अवधेश कुमार वर्मा, एसडीएम गुन्नौर