संभल/चंदौसी। संभल और गजरौला के बीच यदि रेलवे लाइन बन जाए तो संभल सीधे देश की राजधानी दिल्ली से जुड़ जाएगा। ऐतिहासिक एवं पौराणिक नगरी संभल के औद्योगिक विकास को पंख लग जाएंगे। शायद यही कारण है कि संभल के लोग पिछले चार दशकों से लगातार संभल से गजरौला तक रेल लाइन बनाने की मांग करते आ रहे हैं। हर चुनाव में यह मुद्दा उठा। संभल से लेकर दिल्ली के जंतर मंतर तक आंदोलन किए गए। रेल मंत्रियों से मिलकर मांग की गई लेकिन कोई सार्थक प्रयास शुरू नहीं किए जा सके। हालांकि पिछले एक साल में रेलवे स्टेशन की हालत में जरूर सुधार हुआ है। संभल-मुरादाबाद के बीच ट्रेनें भी बढ़ी हैं।
संभल की मेंथा मंडी एशिया की बड़ी मंडियों में गिनी जाती है। आलू उत्पादक क्षेत्र है। सरायतरीन से हड्डी सींग निर्मित कलात्मक वस्तुएं देश में ही नहीं विदेशों में पसंद की जाती है। बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा भी अर्जित होती है लेकिन यहां से उनका पार्सल सीधा संभव नहीं हो पाता है। संभल को यदि गजरौला से रेलवे लाइन के जरिये जोड़ दिया जाए तो संभल देश की राजधानी से सीधे जुड़ जाएगा।
संभल के विकास की गाड़ी तीव्र रफ्तार के दौड़ने लगेगी। यहां के लोगों ने, समाजसेवी संगठनों ने बड़े आंदोलन कर देश के राजनेताओं, जनप्रतिनिधियों, केंद्र और प्रदेश सरकार का ध्यानाकर्षण करने का प्रयास किया।
जनप्रतिनिधियों ने भी इन वर्षों पुरानी मांग को लेकर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई। हालांकि कुछ पूर्व सांसदों ने यह मामला संसद में उठाया। राष्ट्रीय भ्रष्टाचार दमन परिषद आदि कई संगठनों ने संभल में कई बार ट्रेन रोकी।
दिल्ली जाकर भी आंदोलन किए। 1991 में संभल आए प्रधानमंत्री राजीव गांधी के सामने भी मुद्दा उठा। चुनावी सभा को संबोधित करने आए रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव के सामने भी मांग उठी। उन्होंने भरोसा भी दिलाया। रेलमंत्री ममता बनर्जी, दिनेश त्रिपाठी, सुरेश प्रभु से मिलकर भी मांग की गई। सांसद सत्यपाल सैनी ने संभल के लोगों के साथ जाकर रेलमंत्री से मुलाकात की। सर्वे के आदेश हुए, स्वीकृति भी मिल गई, बजट आवंटित करने की बात भी कही लेकिन अभी तक स्थिति जस की तस है।
एक अप्रैल-2019 से संभल-मुरादाबाद के बीच नई ट्रेन शुरू हुई
संभल हातिमसराय रेलवे स्टेशन के स्टेशन मास्टर यशपाल सिंह बताते हैं कि पहले संभल-मुरादाबाद रेलवे स्टेशन के बीच दो ट्रेन चलती थी। डीएमयू पैसेंजर ट्रेन (74304) दोपहर को 12.55 बजे आती थी और 74303 बनकर 1.5 बजे जाती थी। उसके बाद शाम को 6.25 बजे पैसेंजर ट्रेन (74306) आती और 06.35 बजे 74305 बनकर जाती थी। यह दोनों ट्रेनें अभी भी चल रही हैं लेकिन एक अप्रैल-2019 से एक ट्रेन और शुरू हुई, जो सुबह 7.55 बजे मुरादाबाद से संभल पहुंचती है और सुबह 8.5 बजे संभल से रवाना होती है। लेकिन संभल से आगे ट्रैक नहीं होने के कारण सभी ट्रेनें यहीं से वापस लौट जाती हैं।
पिछले एक साल में स्टेशन का हुआ कायाकल्प
-इसमें कोई दो राय नहीं कि पिछले एक साल में स्टेशन का कायाकल्प हुआ है। पिछले एक साल में ट्रेनों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ स्टेशन परिसर में कार्य कराए गए हैं। टीनशेड बने हैं, प्लेटफार्म भी बनवाए गए हैं। कक्षों आदि में भी कार्य कराया गया है। यात्रियों के लिए सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं।