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पालिका की शिथिलता से खुले में शौच जाने को मजबूर है लोग

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संभल। शहर में स्वच्छता मिशन को धार देने के लिए कई स्थानों पर सामुदायिक शौचालय बनाए गए है, लेकिन नगर पालिका प्रशासन की लापरवाही के कारण यह शुरू नहीं हुए है। इससे लोग खुले में शौच जाने के लिए मजबूर है। नगर पालिका परिषद, केंद्र सरकार की इस स्वर्णिम योजना में पलीता लगाने का काम कर रही है।
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शहर में जिन मोहल्लों के घरों में शौचालय बनने की गुंजाइश नहीं है। ऐसे मोहल्लों में तथा सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता मिशन को धार देने के लिए लाखों की लागत से सामुदायिक शौचालय बनाए गए है। इनका निर्माण दिसंबर 2018 में हो गया था, लेकिन दो माह बीत जाने के बाद यह शौचालय शुरू नहीं किए गए है। मोहल्ला सेमरटोला के सामने भी सामुदायिक केंद्र बनाया गया है, जो अभी शुरू नहीं हुआ है, इसमें ताले लटके हुए है। यहां के उन लोगों को खासी परेेशानी हो रही है जिनके घर में शौचालय नहीं है अथवा बनवाने के लिए जगह नहीं है। जबकि स्टेशन के बाहर बने सामुदायिक शौचालय के ताले तोड़कर आम जनता इनका प्रयोग करना शुरू कर दिया है। बताया जाता है कि पालिका इनका शुभारंभ एक बड़े आयोजन के साथ कराना चाहती है। इसलिए इनको अभी तक आमजन के लिए शुरू नहीं किया गया है। हालांकि नगर पालिका प्रशासन ऐसा करने से इनकार कर रहा है। नगर पालिका की इस लापरवाही के कारण लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इससे लोग खुले में शौच जाने को मजबूर है। इससे आम जान को तो परेशानी है ही, लेकिन केंद्र सरकार के स्वच्छता मिशन को पलीता लग रहा है।
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