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धनारी में नही हुआ विकास

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धनारी। गुन्नौर विकास क्षेत्र का सबसे बड़ा गांव होने के बाद भी विकास नहीं हुआ। राजनीति उपेक्षा और स्थानीय नेताओं की नाराजगी के चलते धनारी की सभी योजनाओं को उधरनपुर अजमतनगर गांव में बना दी गई।
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गुन्नौर बड़ा गांव होने के कारण दो ग्राम पंचायतों में विभाजन कर दो प्रधान चुने जाते हैं। जिसमें एक धनारी पट्टी लालसिंह जिसमें मीना की मड़इयां का एक मजरा शामिल है। दूसरी ग्राम पंचायत धनारी पट्टी बालूशंकर में चन्दपुरा, गौरीपुरा और चूरामन की मड़इयां शामिल है। आसपास के गांव धरतराशेख, गढा, बगठेर, बायभूढ, सिंहपुर व टिक्टा गांव की सीमा पर है। लेकिन राजनीति की उपेक्षा के चलते किसी गांव को सड़कों से नहीं जोड़ा गया है। पुलिस थाना, बिजली उपकेंद्र, बैंक, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, साधन सहकारी समिति लेकिन, सभी भवन उधरनपुर अजमतनगर और भागनगर में बना दिए गए। इसीलिए गांव में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूल के बाद कोई शिक्षण संस्था नहीं है। स्वास्थ्य केन्द्र जैसी कोई सुविधा नहीं है।

सड़कों पर भरा रहता है पानी
गांव के मुख्य रास्ते के दोनों ओर नाला नहीं होने से पूरे गांव का पानी सड़क पर जमा हो जाता है। रास्ता तालाब की तरह नजर आने लगता है। गांव के लोग कई वर्षों से परेशान हैं। मुख्य रास्ते पर पानी भरने से सड़क में गहरे गड्ढे हो गए हैं। जिससे वाहन गुजरने में भी परेशानी हो रही है। बाईपास नहीं होने के कारण गन्ना से भरी ओवरलॉड ट्रैक्टर ट्राली पलटने का खतरा बना रहता है। गांव के तंग रास्तों से लकड़ी और गन्ना की ट्राली निकलने से लोगों को भारी परेशानी रहती है। धनारी के नाम से बना बिजली उपकेन्द्र गांव से चार किलोमीटर की दूरी उधरनपुर अजमतनगर में है। लेकिन बिजली की सप्लाई 35 किलोमीटर दूर गुन्नौर सेेेे मिलती है। लाईन जर्जर होने से सप्लाई आए दिन बाधित रहती है। गांव की गलियां में नाली नहीं होने से पानी सड़क से होकर गुजरता है। जिससे रास्ता जल्द खराब हो जाता है। हर बार रास्ता ऊंचा पड़ने से ग्रामीणों के घर नीचे होते चला जा रहा है। जिससे लोगों को बरसात में भारी परेशानी उठानी पड़ती है।
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