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तीन तलाक पर बोले उलेमा-मुसलमानों के मसलो पर सियासत न करे सरकार

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संभल। एक बार में तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) को रोकने के मकसद से लाया गया ‘मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक-2018’ लोकसभा में पास हो गया। हालांकि, इसके कुछ प्रावधानों का विरोध करते हुए कांग्रेस ने इसे संयुक्त प्रवर समिति में भेजने की मांग की तो सत्तारूढ़ भाजपा ने इसे मुस्लिम महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए उठाया गया ऐतिहासिक कदम करार दिया। बिल के लिए रखे गए संशोधनों पर वोटिंग से पहले कांग्रेस और एआईएडीएमके ने सदन से वॉक आउट किया। इसके बाद लोकसभा में मतदान हुआ। बिल पारित होने के बाद ही इसकी राह आसान नहीं है। अभी इस बिल को राज्यसभा में पास कराना होगा। इस बीच स्थानीय उलेमाओं और मौलानाओं ने तीन तलाक बिल को शरीयत में मदालखत करार दिया। केंद्र सरकार पर आरोप लगाए। उनका कहना था कि केंद्र सरकार तीन तलाक बिल के जरिए वोट की सियासत कर रही है।
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शरीयत के खिलाफ है बिल
ओबरी की जामा मस्जिद के इमाम सैयद रिजवान आलम ने कहा कि लोकसभा में तीन तलाक बिल पास होने न होने से कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है। बिल शरीयत के खिलाफ है। शरीयत में पहले से जो व्यवस्था है उसी का पालन किया जाएगा।
हुकूमत कर रही है लोगों को गुमराह
कारी इंतजार बरकाती का कहना है कि हुकूमत लोगों को गुमराह कर रही है। इस बिल के जरिए सियासी एजेंडे पर अमल करने की मंशा है। मुस्लिम समाज और देश के सभी राजनीतिक दल इस बात को समझ रहे हैं। अगर केंद्र सरकार को मुस्लिम महिलाओं से इतनी ही हमदर्दी है तो उसे मुस्लिम महिलाओं को सरकारी सेवाओं में भागीदारी के लिए आरक्षण का बिल लाना चाहिए।
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बंटवारा करके सियासी तकरना चाहती है सरकार
मुफ्ती ए आजम सिरसी आलम रजा खां नूरी का कहना है कि केंद्र सरकार समाज में बंटवारा करके आने वाले 2019 के चुनाव की तैयारी कर रही है। इसीलिए यह बिल लाया गया है। इस बिल के लागू होने से मुस्लिम महिलाओं की हालत में सुधार नहीं होने वाला है। क्योंकि मुसलमान शरीयत के हिसाब से ही अमल करेगा। केंद्र सरकार को चाहिए कि वह इस तरह के बिल न लाए।
तलाक पीड़िताओं के गुजारे के लिए बिल में कोई प्रावधान नहीं
संभल। तीन तलाक पीड़िता समीना ने कहा कि बिल के लिए वह केंद्र सरकार का स्वागत करती हैं। इस मसले पर कांग्रेस का रुख महिला विरोधी मानती हैं। उन्होंने कहा कि बिल पारित होने से पीड़िताओं के लिए न्याय की उम्मीद जगी है। इसमें अच्छी बात यह है कि पीड़िता की सुनवाई होगी और एफआईआर दर्ज की जाएगी। पुलिस अब यह कहकर नहीं टाल सकती की तीन तलाक पीड़िताओं के लिए कोई कानून नहीं है। उन्होंने कहा कि एक बार में दिए गए तीन तलाक को गैर जमानती अपराध माना गया है। बिल के मुताबिक पीड़िता की सुनवाई करके मजिस्ट्रेट दोनों पक्षों में सुलह भी करा सकेगा। अगर पति का दोष सिद्ध होता है तो उसे तीन वर्ष की जेल हो सकेगी जबकि पीड़िता मुआवजा पाने की हकदार होगी।
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