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जल दोहन से बढ़ रहा जल संकट, अगली पीढ़ी को बचाने को जागरूक हो लोग

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बबराला। क्षेत्र के कई हिस्सों में भूगर्भ का जलस्तर गिर रहा है। पानी की समस्या बढ़ती जा रही है। कहीं सरकारी हैंडपंप खराब है तो कहीं 50 फीट से कम गहराई में लगे बोरिंग फेल हो रहे है। इतना ही नहीं नगर व गांवों में लगी पानी की मोटरों ने काम करना बंद कर दिया है और लोग पेयजल के लिए अधिक गहराई वाले बोरिंग करा रहे है। यह समस्या प्रतिवर्ष पहले के मुकाबले और बढ़ती जा रही है। अगर समय रहते नहीं चेते और गुन्नौर के भूड़ इलाके सिंचाई का माध्यम नहीं बदला गया तो गुन्नौर क्षेत्र को लातूर बनने में देरी नहीं होगी। वहीं, हम हमेशा यहीं सोचते हैं बस जैसे तैसे गर्मी का सीजन निकल जाए और बारिश आते ही पानी की समस्या दूर हो जाएगी। यह सोचकर जल संरक्षण के प्रति बेरुखी अपनाए रहते हैं।
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97 प्रतिशत पानी है खारा
हमें जल संसाधन बचाने का काम करना चाहिए। जल संसाधन पानी के वह स्रोत हैं जो मानव जाति के लिए उपयोगी हैं। जिनके उपयोग में आने की संभावना है। पूरे विश्व में धरती का लगभग तीन चौथाई भाग जल से घिरा हुआ है किन्तु इसमें से 97 प्रतिशत पानी खारा है जो पीने योग्य नहीं है। इसमें भी दो प्रतिशत पानी ग्लेशियर व बर्फ के रूप में है। पीने योग्य पानी की मात्रा सिर्फ फीसदी है जिसे बचाने के लिए जल का दोहन न करे। अपने घरों में पानी खर्च कम करे।
उमेश यादव, निदेशक, यूजीएमसी फाउंडेशन।

बारिश के पानी का करे संरक्षण
हम भविष्य के जल संकट से बचने के लिए बारिश के पानी का सही संरक्षण करना चाहिए। बारिश का जल शुद्ध होता है। जिसका प्रयोग पशु पक्षियों के अलावा मनुष्य भी कर सकते है। धरातल पर नदी, तालाब, झील, झरने आदि से सिंचाई की जा सकती है।- ऋषिपाल सिंह, भाकियू नेता।
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बढ़ती जनसंख्या से बिगड़ रहे हालात
जनसंख्या वृद्धि, शहरीकरण के कारण प्रति व्यक्ति के लिए उपलब्ध पेयजल की मात्रा लगातार कम हो रही है। जिससे उपलब्ध जल संसाधनों पर दबाव बढ़ता जा रहा है। जहां एक ओर पानी की मांग लगातार बढ़ रही है। वहीं, दूसरी ओर प्रदूषण और मिलावट के कारण उपयोग किए जाने वाले जल संसाधनों की गुणवत्ता तेजी से घट रही है। ऐसे में हमें स्वच्छ पेयजल को बचाने के लिए जल दोहन को रोकना होगा।
- अमित यादव।

निजी फैक्ट्रियों के जल दोहन पर भी लगे लगाम
क्षेत्र में कुछ निजी मिलों के द्वारा जल का दोहन किया जा रहा है जोकि घातक है। किसान फसल की सिंचाई जरूर करते हैं। आम लोगों के साथ-साथ निजी फैक्ट्रियों पर जल दोहन की लगाम लगानी चाहिए।
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- शशिकांत वार्ष्णेय।
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