चंदौसी। बिजनौर से लेकर अमरोहा, संभल और बदायूं की धरती को सिंचित कर फसलों में हरियाली भरने वाली सोत नदी अब विलुप्त हो रही है, इसका मुख्य कारण उसकी हजारों एकड़ भूमि पर अनाधिकृत कब्जा होना है। नदी सूख तो चुकी ही है, साथ ही कहीं कहीं यह नदी पतली नाली में तब्दील हो चुकी है लेकिन अब जिला प्रशासन को सूखते जल स्रोतों की सुधि आई है। जिलाधिकारी ने सोत नदी को अतिक्रमण मुक्त करके उसी पुनर्जीवित करने का निर्णय लिया है। नदी की खुदाई होगी। अतिक्रमण हटेगा, नदी को उसकी जमीन वापस दिलाई जाएगी। इसके बाद किनारों पर पौधरोपण करके उसकी हरियाली को भी लौटाया जाएगा। योजना परवान चढ़ी तो एक बार फिर सोत नदी कल कल की ध्वनि के साथ बहेगी। हजारों किसानों की खेती के लिए जीवनदायिनी बनेगी।
बिजनौर से निकलने वाली सोत नदी अभी करीब दो दशक पहले संभल जिले सहित कई जिलों की खेती किसानी के लिए वरदान हुआ करती थी। इसे सदा नीरा भी कहा जाता था, क्योंकि इसमें हमेशा पानी रहता था। बिजनौर, अमरोहा, संभल से होती हुई सोत नदी बदायूं की ओर निकल जाती थी। आगे चलकर गंगा में मिल जाती थी। लेकिन समय के साथ इस पर अतिक्रमण होता चला गया। लोगों ने इसमें खेत बनाकर खेती करनी शुरू कर दी। कई स्थानों पर पक्के मकानों का निर्माण हो गया। जिला प्रशासन सिर्फ तमाशाई की भूमिका में रहा। राज्य सरकारें भी सदानीरा के अस्तित्व को विलुप्त होते देखती रही। क्योंकि इस पर अनाधिकृत कब्जा करने वाले अधिकांश असरदार लोग ही थे। जिनका प्रशासन पर भी दबदबा था। कोई कुछ नहीं बोला और सोत नदी की हजारों एकड़ भूमि को कब्जा लिया गया। असमोली चीनी मिल से पहले तो यह नदी पूरी तरह सूख गई। इसके बाद पड़ोसियों खेत स्वामियों ने अपने खेतों को बढ़ा लिया। दबंगों ने जहां भी चाहा, वहां कब्जा कर खेती करनी शुरू कर दी। आलम यह है कि पूरे जिले की सीमा में इस नदी में अब कहीं भी पानी देखने को नहीं मिलता है।
ऐसा नहीं है कि नदी पर कब्जा सिर्फ संभल जिले में हैं, बिजनौर, अमरोहा और बदायूं जिलों में भी नदी पर कब्जा है। पिछले सालों में अमरोहा जिला प्रशासन ने मनरेगा के तहत नदी की खुदाई कराई थी, जो संभल जिले की सीमा तक करा दी गई थी लेकिन संभल जिला प्रशासन इसे आगे नहीं बढ़ाया।
बदायूं जिले में भी व्यापक स्तर पर अभियान चलाकर कब्जा हटवाकर नदी की खुदाई कराने के लिए अभियान चलाया गया था। लेकिन अब संभल जिला प्रशासन ने सोत नदी को पुनर्जीवित करने का निर्णय ले लिया है।
जिला वनाधिकारी डीके चतुर्वेदी ने बताया कि जिलाधिकारी अविनाश कृष्ण सिंह ने चंदौसी के उप जिलाधिकारी कार्यालय में लोक निर्माण विभाग, राजस्व विभाग, वन विभाग सहित कई विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक की। जिसमें स्पष्ट निर्देश दिए कि जिला प्रशासन ने मन बना लिया है कि सोत नदी को पुनर्जीवित किया जाएगा। इसके लिए सभी संबंधित अधिकारी अपनी-अपनी कार्ययोजना तैयार करेंगे।
कहां कितना अतिक्रमण है, इसे चिह्नित करेंगे। अभियान चलाकर अतिक्रमण हटाया जाएगा। नदी में पानी छोड़ा जाएगा। इसके साथ साथ नदी के दोनों ओर छायादार वृक्ष लगाए जाएंगे। ताकि खेतों को सिंचाई के साथ हरियाली भी मिल सके।
उप जिलाधिकारी महेश प्रसाद दीक्षित ने बताया कि जिलाधिकारी के आदेश के क्रम में मंगलवार से ही सभी राजस्व अधिकारियों को निर्देशित कर दिया गया है कि शीघ्र ही सोत नदी की पैमाइश का कार्य पूरा किया जाएगा। अनाधिकृत कब्जेदारों को चिह्नित करके उन्हें बेदखल करने की कार्रवाई की जाएगी।
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सोत नदी को पुनर्जीवित करने का निर्णय लिया गया है। जिलेभर में जहां से भी सोत नदी गुजरती है, उसकी पैमाइश कराकर अनाधिकृत कब्जों को चिह्नित करके कब्जा हटाया जाएगा। नदी की खुदाई कराई जाएगी। पानी छोड़ा जाएगा। नदी के दोनों किनारों पर छायादार वृक्षों के पौधे लगाए जाएंगे। यह अभियान बुधवार से ही शुरू किया जाएगा।
-अविनाश कृष्ण सिंह, जिलाधिकारी संभल।