संभल। सड़क हादसों में घायल लोगों और बीमार व्यक्तियों के लिए जितने रक्त की आकस्मिक जरूरत पड़ती है उतना रक्त उपलब्ध नहीं हो पाता है। क्योंकि स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति जागरूकता की कमी है। लोगों में यह भ्रांति है कि अगर एक बार रक्त दान कर दिया तो शारीरिक रूप से कमजोर हो जाएंगे। जबकि यह एक मिथक है। डा. ऋतु सक्सेना ने दी। वह सिरसी के बहमन पब्लिक स्कूल में मंगलवार को रक्तदान के महत्व पर एक विचार गोष्ठी को संबोधित कर रहीं थीं।
उन्होंने कहा कि रक्तदान से कोई शारीरिक कमजोरी नहीं आती है। बल्कि रक्त संचार ठीक होता है। जल्दी ही रक्त की रिकवरी हो जाती है। अगर आप स्वैच्छिक रक्तदाता बनते हैं तो तमाम लोगों की जान बचाकर उनकी तथा उनके परिजनों की दुआएं हासिल कर सकते हैं।
इस संगोष्ठी में लेफ्टिनेंट प्रवेश कुमार ने बताया कि वह हर छह महीने में किसी जरूरतमंद को रक्तदान करते हैं जबकि एनसीसी कैडेट हरदीप विश्नोई का कहना था कि वह कई बार रक्तदान कर चुके हैं। कभी कोई कमजोरी नहीं आई।
वहीं मेजर एसके भटनागर ने अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से 14 जून को संभल में आयोजित रक्तदान शिविर को सफल बनाने का आह्वान किया। इसमें सुबह आठ बजे से शाम चार बजे तक रक्तदान कर सकेंगे।