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जिले में अब सबमर्सिबल पंप लगाने से पहले लेनी होगी प्रशासनिक अनुमति

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चंदौसी। जिला डार्क जोन की श्रेणी में है लेकिन भूमिगत जल स्तर घटता जा रहा है। लगातार जागरूकता कार्यक्रमों के बावजूद सबमर्सिबल पंपों के जरिये भारी जल दोहन कर रहे हैं। डेयरियों में पशुओं को नहलाया जा रहा है तो गोबर को भी सबमर्सिबल पंप से धोकर नालियों में बहाया जा रहा है। स्वीमिंग पूल, फन सिटी, वाहन धुलाई में अंधाधुंध पानी बहाया जा रहा है लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। क्योंकि जिलाधिकारी ने मंगलवार को जिले भर में सबमर्सिबल पंप लगाने के लिए प्रशासनिक अनुमति को अनिवार्य कर दिया है।
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कभी तालाबों में पशुओं को नहलवाया जाता था, लेकिन तालाब सूख चुके हैं। गांव हो या फिर शहर की डेयरियां, सभी स्थानों पर पशुओं को नहलाने के लिए सबमर्सिबल पंप का प्रयोग किया जा रहा है। शहर डेयरियों में तो गोबर को उठाकर फेंकने की बजाय सबमर्सिबल पंप से सीधे पानी की धारा से गोबर को नालियों में बहाया जा रहा है। ऐसे ही एक बड़ा महादेव स्थित डेयरी स्वामी को पालिका तीन बार नोटिस जारी कर चुकी है लेकिन डेयरी संचालक की मनमानी जारी है।
शहर में बड़ी संख्या में वाटर पार्क, स्वीमिंग पूल, फन सिटी, वाहन धुलाई सेंटर, शादी समारोहों, पार्कों, डेयरियों, फव्वारों आदि पर बड़ी संख्या में पेयजल की बर्बादी की जा रही है। इसमें किसान भी कम नहीं हैं। किसान अब खेतों में सबमर्सिबल लगा रहे हैं। जिन्हें चौबीस घंटे खुला छोड़ दिया जाता है। जब भी बिजली आती है, जल दोहन शुरू हो जाता है। खेतों में बिना जरूरत के भी पानी बहता रहता है। हालांकि पिछले दिनों भाकियू (अअ) की राष्ट्रीय पंचायत में अध्यक्ष चौधरी हरपाल सिंह ने किसानों को जल बचत और जल संचय के लिए जागरूक करने का निर्णय लिया था।
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मंगलवार को शहर के गणेश कालोनी निवासी व शहर भर में अपने पैसे से लोगों के घरों के वाटर टैंक में ओवर फ्लो अलार्म लगाने का अभियान चलाने वाले शिक्षक हरीश कठेरिया ने जिलाधिकारी ने मिलकर अनावश्यक जल दोहन की ओर उनका ध्यानाकर्षण किया तो जिलाधिकारी अविनाश कृष्ण सिंह ने एलान किया कि अब सबमर्सिबल लगाने पहले प्रशासनिक अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
यदि किसी ने बिना अनुमति के सबमर्सिबल लगाया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। इसके साथ ही जहां जहां भी अत्यधिक पानी की बर्बादी होने की संभावना होगी, वहां चेकिंग होगी। वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना भी आवश्यक होगा।
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