संभल/ चंदौसी। सपा-बसपा और रालोद गठबंधन के परंपरागत मतों में भाजपा सेंध नहीं लगा सकी। इसीलिए भाजपा की अपनी सीट भी हाथ से निकल गई। अगर सपा बसपा के परंपरागत वोटों में भाजपा बंटवारा करने में सफल हो जाती तो संभल लोकसभा क्षेत्र का परिणाम कुछ और होता। दिग्गजों की सभाएं भी कमल के लिए कमाल न कर सकीं।
संभल संसदीय क्षेत्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने कैला देवी में सभा की थी। सपा के परंपरागत यादव मतों में सेंध लगाने का प्रयास किया था। इसमें कितनी सफलता मिली यह तो साफ नहीं है लेकिन नतीजा जीत में नहीं आया। यह माना जा रहा है कि अगर सपा-बसपा के मतों में सेंध लग जाती या फिर कांग्रेस के प्रत्याशी और ज्यादा दमदार साबित होते तो भाजपा को फायदा मिल सकता था।
वहीं प्रगतिशील समाजवादी पार्टी पांच हजार से कम पर सिमट गई। यदि प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी को ज्यादा मत मिलते तो भाजपा को फायदा मिल सकता था लेकिन ऐसा हो न हो सका। भाजपा प्रत्याशी को जिताने के लिए केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह बिलारी आए थे।
बताते चलें कि संभल, असमोली, चंदौसी,बिलारी और कुंदरकी को मिलाकर संभल लोकसभा क्षेत्र बनता है। भाजपाई दिग्गजों की कई सभाएं हुईं। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य चंदौसी के मौलागढ़ में आए। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी भी चुनाव के दौरान आए थे परंतु कमल के लिए कोई खास कमाल नहीं हुआ।