चंदौसी। मौसम में तेजी से बदलाव हो रहा है। गर्मियां विदा ले रही हैं। ऐसे में एक बार मौसमी बीमारियां पैर पसारने लगी है। सितंबर महीने में सिर्फ कुढ़ फतेहगढ़ क्षेत्र के ही गांवों में दो दर्जन लोग बुखार से मौत का शिकार हो गए थे। पिछले एक महीने में जिले में 14 बुखार पीड़ितों की मौत हो चुकी है। जिन लोगों की मौत हुई उनके परिजनों का दावा है कि डाक्टरों ने उन्हें डेंगू आशंकित बताया था। बात यदि सितंबर 2019 माह की करें तो सिर्फ नरौली व बिलारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्र में आने वाले कुढ़ फतेहगढ़ क्षेत्र के चितौरा गांव में पांच, मिलक दियोरा खास में दो, मुड़िया खेड़ा में चार, पलथा मिठनपुर गांव में पांच, नगला पूर्वा में पांच व जहांगीरपुर, भगतपुर पहेली, धर्मपुर रत्ता में एक एक बुखार पीड़ित की मौत हो गई थी।
परिजनों ने बताया कि कुछेक को छोड़ दें तो किसी की डेंगू की विधिवत जांच तो नहीं हो सकी थी लेकिन इसमें अधिकांश को डेंगू की आशंका जताई गई थी। इनमें से कई मरीजों ने मुरादाबाद, दिल्ली आदि जाकर भी उपचार कराया था। इसके अलावा अक्तूबर माह में जिलेभर में सर्वाधिक प्रभावित असमोली क्षेत्र रहा है। पांच अक्तूबर को कुढ़ फतेहगढ़ के भगतपुर पहले गांव के राजवीर की बेटी शिवानी की मौत हुई।
17 अक्तूबर को असमोली के मुबारकपुर बंद में दिलशाद की बेटी रानी ने दम तोड़ा। 19 अक्तूबर को कुढ़ फतेहगढ़ क्षेत्र के धर्मपुर रत्ता में सपा नेता महेश यादव की बुखार से मौत हो गई थी। 21 अक्तूबर को फिर असमोली के बाबूखेड़ा में किसान कैलाश की मौत हो गई थी। बुकनाला सादात में सीबा जहरा ने बुखार से प्रभावित होकर दम तोड़ दिया था। कुल मिलाकर छह से 29 अक्तूबर के बीच असमोली क्षेत्र के मुबारकपुरबंद गांव में तीन, राजा गालबपुर में चार, तलवार गांव में दो, बुकनाला सादात, ओबरी आदि को मिलकर पूरे महीने में चौदह मौतें हुई हैं। मृतकों के परिजनों ने यही बताया था कि उन्हें लगातार कई दिनों से बुखार आ रहा था। जो ठीक नहीं हुआ, बुखार के कारण ही उनकी मौत हो गई है। संयुक्त स्वास्थ्य केंद्र चंदौसी के प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. संतोष कुमार ने बताया कि चंदौसी क्षेत्र में तो डेंगू प्रभावित कोई मरीज रिपोर्ट नहीं किया गया है। लेकिन आशंका तो जरूर है। मलेरिया विभाग भी लगातार फॉगिंग आदि करा रहा है। नगर पालिका परिषद को भी शहरी क्षेत्र में लगातार फॉगिंग करानी चाहिए।