संभल। कान्वेंट स्कूलों की तर्ज पर परिषदीय विद्यालयों को भी मॉडल और अंग्रेजी माध्यम से विकसित करने की योजना सरकार ने बनाई थी। इसके लिए जिलेभर में प्रत्येक ब्लाक से विद्यालयों का चयन किया गया, मगर इन विद्यालयों की हकीकत कुछ और ही है। पुस्तक के अभाव में शिक्षा व्यवस्था पटरी पर नहीं है। शिक्षकों की कमी और संसाधन के अभाव में पुरानी व्यवस्था से ही किसी तरह काम चलाया जा रहा है।
दरअसल गत वर्ष सरकार ने परिषदीय विद्यालयों को कान्वेंट स्कूलों की तर्ज पर अंग्रेजी माध्यम से संचालन कराने की योजना बनाई थी। आदेश जारी होने के बाद प्रक्रिया काफी तेज चली, लेकिन जैसे-जैसे समय बीता योजना कमजोर होती चली गई। एक के बाद एक बहाने में उलझा शिक्षा विभाग न स्कूलों की काया पलट सका और न शिक्षकों का चयन हुआ। मौजूदा हाल में जो विद्यालय अंग्रेेजी माध्यम के लिए चयनित हो चुके हैं। वहां हिंदी माध्यम से ही बच्चों को पढ़ाई कराई जा रही है।
सत्र पहली अप्रैल से शुरू हो चुका है। महीने भर का समय बीत गया, लेकिन अंग्रेजी माध्यम के लिए चयनित किए गए विद्यालयों के लिए प्रक्रिया में कोई तेजी नजर नहीं आ रही। मालूम हो सरकार की मंशा के अनुसार प्रत्येक ब्लाक पर आठ विद्यालयों का चयन किया गया था। जिलेभर के आठ ब्लाक पर 64 विद्यालयों में अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई कराई जानी थी। इन विद्यालयों में शिक्षकों की तैनाती के लिए चयन प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन शुरूआती तेजी के बाद अब सब ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है।
मॉडल स्कूल और अंग्रेजी माध्यम का सपना अधर में लटका है। बच्चों का यह सपना कब पूरा होगा? यह बड़ा सवाल है। जब इस बारे में बेसिक शिक्षा अधिकारी से विरेंद्र प्रताप सिंह से पूछा गया तो वह संतुष्ट जबाव नहीं दे पाए। साथ ही फोन कट कर दिया।
जनपद में 90 विद्यालय अंग्रेजी माध्यम के लिए गत वर्ष चयनित किए गए थे। इस वर्ष भी 90 विद्यालयों का चयन हुआ है। आचार संहिता के चलते शिक्षकों की चयन प्रक्रिया नहीं हो सकी है। पुस्तकें अंग्रेजी माध्यम की अब तक आई नहीं हैं। जल्द आ जाएंगी। -सुनील सक्सेना, खंड शिक्षा अधिकारी, संभल।