चीनी दाम धड़ाम होने से किसानों के गन्ना मूल्य का भुगतान फंस गया है। अकेले संभल जिले के गन्ना किसानों का 110 करोड़ रुपये का ऐसा भुगतान है जिसे 14 दिन से ज्यादा हो गए हैं।
जिला गन्ना अधिकारी ने भुगतान के लिए चीनी मिलों के अधिकारियों से आग्रह किया है। असमोली और रजपुरा में स्थित धामपुर शुगर मिल्स लिमिटेड और मझावली स्थित वीनस शुगर मिल के अधिकारियों ने जल्दी ही भुगतान किए जाने का भरोसा दिया है लेकिन देरी के चलते किसान परेशान हैं। कुछ किसानों को अपनी जरूरत पर लोगों से कर्ज लेना पड़ रहा है। वहीं रोजमर्रा के कामकाज भी प्रभावित हो गए हैं।
चीनी का भाव अक्तूबर 2017 में 3800 रुपये प्रति क्विंटल था। धामपुर शुगर मिल की चीनी तो उच्चतम स्तर 3900 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर बिकी थी लेकिन इसके बाद नवंबर में चीनी 3500 और जनवरी में 3300 रुपये प्रति क्विंटल हो गई।
फरवरी में यही कीमत 3050-3100 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गई। इसके बाद मार्च में चीनी के दाम 3000-3050 रुपये प्रति क्विंटल तक है। इसमें भी खरीदार कम हैं। मिलों के पास भारी मात्रा में चीनी का स्टाक है। चीनी की अपेक्षित खपत न निकलने से गोदाम भरे पड़े हैं। चीनी न उठने की वजह से बैंकों की क्रेडिट लिमिट चीनी मिलों के खातों में खाली नहीं है।
नतीजा भुगतान फंस रहे हैं हालांकि चीनी मिल प्रबंधन अन्य स्रोतों से भुगतान की तैयारी कर रहे हैं लेकिन इसमें वक्त लग रहा है। देरी का खामियाजा किसान भुगत रहे हैं। अगर चीनी के दाम और घटे तो भुगतान पर संकट छाएगा। इस स्थिति में चीनी उद्योग को बचाने के लिए सरकार को चीनी के निर्यात के विकल्पों पर विचार करना चाहिए।
जिला गन्ना अधिकारी कुलदीप सिंह ने कहा कि चीनी मिलों के प्रबंधन से बकाया के संबंध हमें सोमवार को बातचीत की गई है। चीनी मिलों ने एक दो दिन में भुगतान करने का भरोसा दिया है। उनके मुताबिक असमोली पर फिलहाल 14.57 करोड़ रुपये, रजपुरा स्थित चीनी मिल पर 34.62 करोड़ तथा मझावली चीनी मिल पर 33.97 करोड़ रुपये बकाया हैं। तीनों चीनी मिल का बकाया 110 करोड़ रुपये बैठता है।