सहारनपुर। जैन बाग स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर में दशलक्षण महापर्व के तृतीय दिवस पर उत्तम आर्जव धर्म की पूजा अर्चना की गई।
जैन मुनि अनुपम सागर महाराज व समत्व सागर महाराज ने कहा कि उत्तम-आर्जव धर्म सरलता, मन, वचन, काय तीनों में एकरूपता का होना आर्जव है। आर्जव अर्थात सरलता आत्मा का स्वभाव है। स्वभाव को छिपाने की जरूरत नहीं होती, जो छिपाना पड़े, वही तो मायाचारी है, आज पग-पग पर धोखाधड़ी देखने को मिलती है। मनुष्य अभिमान करता है कि मैंने सामने वाले को ठग लिया, लेकिन वह खुद ही ठगा जाता है।
इस दौरान पंडित विकर्ष शास्त्री, सीए अनिल जैन, संजीव जैन, चौधरी अनुज जैन, सुखमाल चंद जैन, संदीप जैन, सतपाल जैन, अंकुर जैन, सिद्धार्थ जैन, अरुण जैन, नवीन, मनीष, अभिषेक जैन, आदिश जैन, इंद्र जैन मौजूद रहे। संवाद