सहारनपुर। 37.2 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चली ठंडी हवा से पारा धड़ाम हो गया है। रविवार की तुलना में सोमवार को न्यूनतम के साथ अधिकतम तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई। ठंडी हवाओं के ही कारण सोमवार की सुबह लोग सर्दी से कांपते नजर आए। दिन में खिली धूप के बावजूद सर्द हवा ने लोगों को परेशान किया। मौसम विभाग ने अगले दो दिन ऐसे ही हवा चलने का अनुमान जताया है।
जनपद में बीते तीन दिन से तेज और ठंडी हवा चल रही है। रविवार को दिन के साथ ही रात भर भी हवा चलती रही। इसकी वजह से रात में ठंडक अचानक बढ़ गई। सोमवार की सुबह तेज हवाओं के कारण लोगों को सर्दी अधिक महसूस हुई। सोमवार को न्यूनतम तापमान 03 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो रविवार को 7.5 डिग्री सेल्सियस था। अधिकतम तापमान भी 21.5 डिग्री सेल्सियस रहा, जो रविवार को 22.8 डिग्री सेल्सियस था। यानी न्यूनतम के साथ अधिकतम तापमान में भी गिरावट रही। इसके बाद दिन भर हवाएं चलती रही। धूप निकलने के बावजूद लोगों ने ठंडक महसूस की और वह गर्म कपड़ों में रहे। मौसम विभाग की मानें तो अगले दो दिन ऐसे ही हवा चलने का अनुमान है। उसके बाद मौसम सामान्य होगा।
बाजारों में उड़ रहे धूल के गुबार
शहर भर में स्मार्ट सिटी योजना के तहत सीवर लाइन डालने, सड़क बनाने सहित कईं कार्य चल रहे हैं। इसकी वजह से सड़कें खोदी पड़ी हैं और मिट्टी सड़कों पर बिखरी है। तीन दिन से चल रही तेज हवाओं के कारण बाजारों में धूल के गुबार उड़ रहे हैं। दुकानदारों के साथ ही ग्राहक और राहगीर धूल से परेशान हैं।
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गेहूं की फसल और आम की बागवानी को नुकसान का खतरा
-हवा चलने के कारण पतला रह सकता है गेहूं का दाना, आम के बोर में भी लग सकते हैं रोग
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। तेज हवा और ठंडक का बढ़ना किसानों और बागवानों को नुकसान पहुंचा सकता है। कृषि वैज्ञानिकों की मानें तो इससे गेहूं का दाना कमजोर होने की वजह से उत्पादन पर असर पड़ सकता है। साथ ही आम के बोर में खर्रा और इंथ्रेनोज बीमारी लगने का खतरा बढ़ जाता है।
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. आईके कुशवाहा ने बताया कि इन दिनों गेहूं की फसल में पूरी तरह दाना नहीं बैठा है, लेकिन बाली में जो दाना आ चुका है। हवा के कारण उस दाने की ग्रोथ यानी उन्नति रुक सकती है और वह सूखकर पतला रह सकता है। सामान्य भाषा में इसे फसल में से हवा निकलना कहते हैं। इसकी वजह से गेहूं का उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जिसका नुकसान किसानों को होता है, साथ ही पतले अनाज का पूरा मूल्य भी नहीं मिल पाता है। यदि हवा आगे भी जारी रहती है तो किसान गेहूं की फसल में हल्का पानी दे सकते हैं। उससे दाने के पतला रहने का खतरा कम हो जाता है। रही बात फसल गिरने की तो फसल के गिरने का खतरा तब रहता है, जब गेहूं की फसल पर बालियां पूरी तरह आ जाती हैं और पौधा ऊपर से भारी हो जाता है।
इसके अलावा बागवानों की बात करें तो इन दिनों आम में बोर आने वाला है। इस समय हवा में ठंडक के कारण बोर में खर्रा और इंथ्रेनोज बीमारी लगने का खतरा है। इससे आम की फसल खराब हो सकती है, जिसका नुकसान बागवानों को उठाना पड़ सकता है।