सहारनपुर। जनपद में कई स्थानों पर गन्ने की फसल पर सफेद गिडार का प्रकोप दिखाई देने लगा है। यह कीट जमीन से पोषण लेने वाली पौधे की छोटी जड़ों को खाकर फसल को नष्ट कर देता है। किसान इस समस्या को लेकर कृषि विज्ञान केंद्र पर आ रहे हैं। प्रभावित फसल की उत्पादकता में 15 से 20 फीसदी तक कमी आने की आशंका है।
जनपद में हुई कम बारिश से गन्ने की फसल पर सफेद गिडार का प्रकोप बढ़ रहा है। बारिश के चलते यह कीट जमीन में काफी नीचे तक चला जाता है। कम बरसात के चलते सफेद गिडार भूमि में ऊपर की ओर आ जाता है। सफेद रंग का यह कीट पौधे की पोषण लेने वाली छोटी जड़ों को खाकर नष्ट कर देता है। जिससे प्रभावित पौधों का पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता। इससे पौधा धीरे धीरे सूखने लगता है। प्रभावित फसल का उत्पादन 15 से 20 प्रतिशत तक प्रभावित होने की आशंका है। इस कीट की खासियत यह है कि जब किसान कीटनाशक का प्रयोग करता है तो यह जमीन में काफी नीचे चला जाता है। इससे किसान समझ लेता है कि कीट समाप्त हो गया। कीटनाशक का प्रभाव कम होने पर यह कीट फिर से ऊपर आकर फसल को नुकसान पहुंचाना शुरू कर देता है। गांव पनियाली के किसान नवाब सिंह, आसनवाली के आशीष, बढेड़ी कोली के मैनपाल और गंगोह के अंकुर आदि ने कृषि विज्ञान केंद्र पहुंचकर सफेद गिडार पर नियंत्रण को लेकर कृषि वैज्ञानिकों से सलाह ली है।
जैविक विधि से करें नियंत्रण
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी और फसल सुरक्षा विभाग के प्रोफेसर डॉ. आईके कुशवाहा ने बताया कि सफेद गिडार पर नियंत्रण के लिए जैविक विधि का प्रयोग प्रभावी रहता है। इसके लिए किसानों को मैटारइजियम एवं बवेरिया का प्रयोग करना चाहिए। यह फंगस सफेद गिडार को बीमार बनाकर समाप्त करने में मदद करता है।