सहारनपुर। हिमाचल और उत्तरकाशी के पहाड़ों पर मौसम में आए बदलाव के कारण हथिनीकुंड बैराज में जलस्तर कम हुआ है। साथ ही गर्मी के कारण सिंचाई के लिए बढ़ी पानी की मांग से समस्या बनी हुई है। किसानों की शिकायत है कि उन्हें सिंचाई के लिए उतना पानी नहीं मिल रहा है, जितने की जरूरत है।
हथिनीकुंड बैराज प्राकृतिक पानी का बड़ा स्रोत है, जहां से पांच राज्यों को पीने और सिंचाई के लिए पानी जाता है। इनमें हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और राजस्थान शामिल हैं। पानी का इस्तेमाल दिल्ली में पीने और सिंचाई के लिए तथा बाकी राज्य केवल सिंचाई में करते हैं। हथिनीकुंड बैराज में आने वाले पानी की बात करें तो वह हिमाचल और उत्तरकाशी की पहाड़ियों से निकलने वाली नदियों से आता है।
बीते करीब एक सप्ताह से हथिनीकुंड बैराज का पानी कम हुआ है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों के अनुसार, कुछ दिन पहले पहाड़ों में अच्छी गर्मी थी, जिसकी वजह से बर्फ तेजी से पिघल रही थी। इस कारण हथिनीकुंड बैराज लबालब था, लेकिन बीते दिनों हल्की बूंदाबांदी के बाद पहाड़ों के तापमान में दस डिग्री तक की गिरावट आई है, जिसकी वजह से बर्फ उतनी तेजी से नहीं पिघल रही है, जितनी तेजी से पिघलनी चाहिए। बारिश भी नहीं हो हो रही है।
- रात 12 बजे बढ़ जाता है नहरों में पानी
इन दिनों नहरों में पानी रात 12 बजे के आसपास बढ़ जाता है, जबकि दिन में 11 बजे पानी कम हो जाता है। इसकी वजह यह है कि दिन भर बर्फ पिघलने के बाद पानी को नहरों तक पहुंचने में समय लगता है, जो रात 12 बजे तक यहां पहुंचता है। और रात में बर्फ नहीं पिघलने के कारण दिन में करीब 11 बजे पानी कम हो जाता है।
- हथिनीकुंड बैराज में पानी बढ़ा है या कम हुआ है इसकी जानकारी नहीं है। लेकिन हमें सिंचाई के लिए जितने पानी की जरूरत है उतना पानी मिल रहा है। पिछले दिनों पीडीडीएफसी टूटने की वजह से पानी शामली को देना पड़ा था, जिसकी वजह से परेशानी रही थी। फिलहाल ऐसी कोई समस्या नहीं है। - अभिमन्यु सिंह राय, अधिशासी अभियंता, अपर खंड पूर्वी यमुना नहर।