सहारनपुर। सरकारी अस्पतालों में बच्चों को निमोनिया से बचाव के लिए लगने वाली न्यूमोकोल कंजुगेट वैक्सीन (पीसीवी) खत्म हो गई है। अस्पतालों में अभिभावक बच्चों को लेकर पीसीवी टीका लगवाने के लिए पहुंच रहे हैं, मगर उन्हें बैरंग लौटना पड़ रहा है। बच्चों को निमोनिया से बचाव का टीका नहीं लग पाने के कारण अभिभावक परेशान हैं।
स्वास्थ्य विभाग 13 फरवरी से दूसरे चरण का नियमित टीकाकरण अभियान चला रहा है। इस दौरान टीमें घर-घर बच्चों का टीकाकरण कर रही है, इसमें शून्य से पांच साल तक के बच्चों को खसरा, रूबेला, काली खांसी, टीबी, निमोनिया आदि बीमारियों से बचाव का टीका लगाया जा रहा है। टीकाकरण अभियान में पीसीवी का टीका नहीं है। यह टीका एक साल तक के बच्चों को तीन बार लगाया जाता है। डेढ़ माह, साढ़े तीन माह और नौ माह की आयु होने पर बच्चों को यह टीका लगाना जरूरी होता है। लेकिन वर्तमान में वैक्सीन नहीं होने के कारण सभी अस्पतालों से अभिभावक परेशान होकर लौट रहे हैं। जबकि, प्राइवेट अस्पतालों में यह इंजेक्शन 2500 से 4000 रुपये तक लगता है।
क्या है निमोनिया
निमोनिया सांस से जुड़ी गंभीर बीमारी है, जिसमें फेफड़ों में इंफेक्शन हो जाता है। फेफड़ों में सूजन आ जाती है और कई बार पानी भी भर जाता है। यह बुखार या जुकाम होने के बाद होता है। पांच साल से छोटे बच्चों में इसका खतरा अधिक होता है। निमोनिया ज्यादातर बैक्टीरिया, वायरस या फंगस के हमले से होता है। मौसम बदलने, सर्दी लगने, फेफड़ों पर चोट लगने के अलावा खसरा और चिकनपॉक्स जैसी बीमारियों के बाद भी इसकी आशंका बढ़ जाती है।
सरकारी अस्पतालों में निमोनिया से बचाव के लिए पीसीवी वैक्सीन फिलहाल खत्म है। हमने शासन को वैक्सीन खत्म होने के बारे में अवगत करा दिया है। साथ ही वैक्सीन की डिमांड भेजी है, ताकि बच्चों का नियमित टीकाकरण प्रभावित न हो सके।
डॉ. पूजा शर्मा, एसीएमओ