संवाद न्यूज एजेंसी
देवबंद। जमीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक व प्रसिद्ध आलिम-ए-दीन मौलाना कारी इस्हाक गोरा ने हेल्पलाइन पर रोजेदारों के सवालों के जवाब दिए। उन्होंने कहा कि इस महीने के आखिरी दस दिन सबसे अहम और रहमत वाले होते हैं। रमजान के आखिर में एतकाफ (एकांतवास) में बैठने वालों पर अल्लाह की रहमत होती है।
सवाल: सहारनपुर के मोहल्ला मूत्रिबान निवासी जफर ने मालूम किया कि रमजान के आखिरी अशरे यानी आखिरी दस दिनों में शब-ए-कद्र कौन कौन सी रातें होती हैं। इन रातों की क्या फजीलत है। हमें इन रातों को कैसे गुजारनी चाहिए?
जवाब: शरीयत के अनुसार शब-ए-कद्र रमजान में आने वाली बड़ी मुबारक रातें है। शब-ए-कद्र की रात को एक हजार महीने की रातों से अफजल बताया गया है। इसे ताक रातों में यानी 21, 23, 25, 27 व 29 वीं शब में तलाश करनी चाहिए।
सवाल: गंगोह निवासी मुनीब ने पूछा कि उनके पड़ोस की मस्जिद में उनके कुछ दोस्त एतकाफ में बैठे हैं। वह मोबाइल पर देर देर तक बातें करते हैं और सोशल मीडिया का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। शरीयत के अनुसार क्या यह दुरुस्त है?
जवाब: एतकाफ का असल मकसद ही यही है कि मस्जिद में आने के बाद कोई व्यक्ति दूसरी चीजों से मतलब न रखें। शरीयत के अनुसार एतकाफ वालों को पूरी फुर्सत होने की स्थिति में मस्जिद में जाने की सलाह दी जाती है। इसीलिए एतकाफ करने वाले के लिए मोबाइल फोन और सोशल मीडिया का इस्तेमाल सही नहीं है। उनको अपना सारा वक्त इबादत में गुजारना चाहिए।