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Saharanpur News: उर्स में जुब्बा शरीफ की जियारत को लेकर दो पक्षों ने ठोकी दावेदारी

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गंगोह। एक ओर जहां हजरत कुतबे आलम शेख अब्दुल्ल कुद्दुस के उर्स की तैयारियां जोरशोर से जारी हैं वहीं, उर्स की मुख्य रस्म जुलूस जुब्बा शरीफ की जियारत को लेकर दो पक्षों द्वारा अपनी अपनी दावेदारी पेश करने से विवाद गहरा गया है। दोनों पक्षों ने एसडीएम के समक्ष अपनी-अपनी दावेदारी पेश की है। प्रकरण को लेकर राजनेता भी आमने सामने आ खड़े हुए हैं।
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हजरत कुतबे आलम का उर्स आगामी 14 जनवरी से शुरू होने जा रहा है। 16 जनवरी को निकलने वाली हजरत कुतबे आलम के जेबतन फरमाई गई गुदड़ी की जियारत को लेकर दो पक्ष कलियर के सज्जादे अलीशाह ऐजाज साबरी कुद्दुसी एवं आमिर पुत्र नासिर जमील जुलूस जुब्बा शरीफ में गुदड़ी पहनकर जियारत कराने के लिए अपनी-अपनी दावेदारी कर रहे हैं। अलीशाह का कहना है कि अबसे पूर्व 26 वर्षों तक उनके ताऊ शाह मंसूर साबरी जो कि कलियर के सज्जादे भी थे, वो इस रस्म को अदा करते आ रहे थे। उनकी मृत्यु के बाद उनके स्थान पर उन्हें कलियर का सज्जादा बनाया गया है। इसलिए गंगोह की उक्त रस्म को अदा करने का हक भी उन्हीं का बनता है। उधर आमिर का कहना है कि 1995 तक उनके पिता के सौतेले भतीजे शाह कुरैश अहमद कुददूसी यह रस्म अदा करते थे, अत उनकी मृत्यु के पश्चात उनका सबसे निकट संबंधी होने के कारण उनकी सबसे सशक्त दावेदारी बनती है। इस बारे में दोनों ने ही एसडीएम के यहां प्रार्थनापत्र देकर इसकी इजाजत मांगी है। एसडीएम रम्या आर ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद दोनों को ही यथा स्थिति रखने के निर्देश दिए हैं। बता दें कि गत वर्ष भी कोरोना के चलते जुब्बा शरीफ जुलूस नही निकल सका था। अब उक्त विवाद में राजनीति भी शुरू हो गई है। एक पक्ष के साथ पूर्व चेयरमैन व बसपा नेता नोमान मसूद तो दूसरी तरफ से रालोद के प्रदेश सचिव हाजी सलीम कुरैशी आमने-सामने है। एसडीएम रम्या आर ने दोनों को आपसी बातचीत से मामला निपटाने की भी सलाह देते हुए अग्रिम आदेश तक शांति व्यवस्था बनाये रखने के निर्देश दिए हैं।
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