सहारनपुर। टीबी के सबसे खतरनाक प्रकार मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट (एमडीआर) टीबी की दवाएं अभी तक नहीं मिली हैं। इसके चलते इन मरीजों को तो समस्या हो रही हैं, साथ ही यह अन्य लोगों के लिए गंभीर संक्रमण की वजह बन रहे हैं।
टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत टीबी के मरीजों को सभी दवाएं पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध कराई जातीं हैं। टीबी के मरीजों में करीब पांच फीसदी ऐसे होते हैं, जिन पर दवा बेअसर हो जातीं हैं। ऐसे में अन्य दवाओं से उनका इलाज किया जाता है। इसे एमडीआर कहा जाता है। टीबी की सबसे गंभीर स्थिति तब होती है जब उस पर कई प्रकार दवाएं बेअसर हो जाएं।
एमडीआर टीबी के कुल मामलों में इनकी संख्या करीब पांच से 10 फीसदी होतीं हैं। इन मरीजों के लिए दवाएं बेहद सीमित होतीं हैं। इस समय जिले में साइक्लोसीरिन और लिनेजोलिड नाम की दवाएं सरकारी आपूर्ति में नहीं आ रही हैं। शासन ने इनकी खरीदारी स्थानीय स्तर पर ही करने के निर्देश दिए हैं। जिला क्षय रोग विभाग द्वारा संबंधित कंपनी को डिमांड भेजे एक सप्ताह से अधिक हो गया है, लेकिन अभी तक दवाएं नहीं आ रही हैं। इससे मरीजों की परेशानी बढ़ रही है। एमडीआर के मरीजों को एक से दो साल तक दवा खानी होती है।
- इस सप्ताह दवाएं आने की उम्मीद
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. सर्वेश कुमार ने बताया कि शासन ने एमडीआर की दो दवाएं लोकल परचेज के जरिये खरीद की बात कही है। उन्होंने दवाइयों को मंगवाने के लिए संबंधित कंपनी को डिमांड पत्र भेज दिया है। उम्मीद है कि इस सप्ताह तक एमडीआर की दवाइयां पहुंच जाएं।