सहारनपुर। रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले विपरीत असर को देखते हुए किसानों को जैविक खेती के प्रति प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके चलते किसानों का रुझान जैविक खेती की ओर बढ़ा है। जिले में जैविक खेती का रकबा बढ़कर 400 हेक्टेयर तक पहुुंच गया है।
जैविक खेती मानव के साथ ही मृदा के स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है। जिले में जैविक खेती के लिए 20 कलस्टर बनाए गए हैं। प्रत्येक कलस्टर का क्षेत्रफल 20 हेक्टेयर का बनाया गया है। कृषक उत्पादन संगठनों द्वारा बनाए गए कलस्टरों में शामिल किसानों को जैविक खेती के प्रति जागरूक किया गया है। इसके चलते जनपद में गेहूं, धान से लेकर अन्य खाद्यान्न फसलों को की जैविक खेती की जा रही है। जैविक खेती करने वाले कलस्टर में शामिल किसानों को जैविक कीटनाशक, जैविक खाद तैयार करने आदि की जानकारी भी दी गई है। जैविक खेती कर रहे गांव कोठड़ी बहलोलपुर के किसान संजय चौहान और नानौता क्षेत्र के मोक्षार्थ कृषक उत्पादक संगठन के योगी अरुण कुमार सिंह का कहना है कि आने वाला भविष्य जैविक खेती का ही है। जैविक उत्पाद न सिर्फ मानव बल्कि भूमि के लिए भी वरदान है।
जनपद में जैविक खेती के लिए 20 कलस्टर बनाए गए हैं। इनका क्षेत्रफल 400 हेक्टेयर है। इसमें गेहूं, गन्ना, सरसों से लेकर अन्य खाद्यान्नाें की खेती हो रही है। जैविक खेती करने वाले किसानों की जमीन को जैविक प्रमाण पत्र भी दिलाया जाएगा। जैविक उत्पाद न सिर्फ सेहत के लिए लाभकारी है बल्कि बाजार में इनका भाव भी बढि़या मिलता है। - डॉ. राकेश कुमार, उप निदेशक कृषि