सहारनपुर। परिवहन निगम ने जिन प्राइवेट बसों को अनुबंध किया, उनमें से कई बसें ऐसी हैं, जिन पर न तो अनुबंधित लिखा हुआ है और न ही वैधता तिथि लिखी हुई। यह इसलिए जरूरी है कि जिससे रोडवेज से मिलती-जुलती कोई फर्जी बस तो नहीं चल रही। यह स्थिति तब है कि जब कई अन्य जिलों में इस तरह रोडवेज के नाम पर फर्जी बसें पकड़ी जा चुकी है।
सहारनपुर परिवहन निगम रीजन में छह डिपो हैं। इनमें से सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, खतौली, शामली और गंगोह डिपो में 164 अनुबंधित बसों का बेड़ा है। सबसे ज्यादा 55 अनुबंधित बसें मुजफ्फरनगर डिपो में हैं। शामली व गंगोह डिपो में केवल अनुबंधित बसें ही हैं। रीजन का छुटमलपुर ऐसा है, जिसमें अनुबंधित बस नहीं हैं। परिवहन निगम टेंडर निकालकर प्राइवेट बसों को अनुबंध करता है। सभी प्रक्रियाएं अपनाई जाती हैं। उसके बाद ही निगम प्राइवेट बसों को अनुबंध पर रखता है। लेकिन रीजन में काफी अनुबंधित बसें ऐसी चल रही हैं, जिन पर अभी तक वैधता की तिथि नहीं लिखी है। कुछ बसें ऐसी हैं, जिन पर अनुबंधित ही नहीं लिखा गया। इनका तभी पता चलता है कि जब इन पर अनुबंधित और उसकी वैधता की तिथि लिखी हो।
रोडवेज की अनुबंधित बसों पर वैधता की तिथि नहीं लिखे होने की जानकारी नहीं है। अगर ऐसा है तो मामला गंभीर है। जिन डिपो में अनुबंधित बसें हैं, उन्हें चेक कराया जाएगा। उन पर वैधता की तिथि लिखवाई जाएगी।
- योगेंद्र प्रताप सिंह, क्षेत्रीय प्रबंधक, परिवहन निगम