सहारनपुर। अत्यधिक दोहन और रासायनिक कीटनाशकों और उर्वरकों के बढ़ते प्रयोग के चलते भूमि लगातार कमजोर हो रही है। इससे न सिर्फ मृदा में पोषक तत्वों की कमी आ रही है बल्कि कृषि उत्पाद भी मानव स्वास्थ्य पर विपरीत असर डाल रहे हैं। इसके चलते कृषि विभाग परंपरागत खेती पर जोर दे रहा है। जनपद में इसके लिए 20 गांवों में कलक्टर बनाए गए हैं। इनमें 400 हेक्टेयर क्षेत्रफल में परंपरागत खेती की जाएगी। रबी सीजन से इसकी शुरुआत की जाएगी।
भूमि के साथ ही सुधरेगी लोगों की सेहत
परंपरागत खेती से न सिर्फ भूमि में जीवांश कार्बन की मात्रा बढ़ेगी बल्कि उच्च गुणवत्तायुक्त खाद्यान्न का उत्पादन भी होगा। इससे मृदा के साथ ही लोगों की सेहत भी सुधरेगी। इस खेती में पोषक तत्वों की पूर्ति करने के लिए हरी खाद, कंपोस्ट, गोबर की खाद, जीवामृत, बीजामृत, घनामृत, राइजोबियम बैक्टीरिया आदि का प्रयोग किया जाएगा। फसलों की रोगों और कीटनाशकों के प्रकोप से बचाने के लिए नीम ऑयल, नीम केक, ट्राइकाेडर्मा, फैरोमेन ट्रेप, लाइट ट्रेप आदि का इस्तेमाल होगा। इसमें किसी भी प्रकार के रासायनिक कीटनाशकों या उर्वरकों का प्रयोग नहीं किया जाएगा।
जनपद में 400 हेक्टेयर में परंपरागत खेती की जाएगी। इसके लिए 20 कलक्टर बनाए गए हैं। परंपरागत खेती करने वाले किसानों को बायो फर्टीलाइजर आदि के लिए अनुदान भी दिया जाएगा। इस खेती से भूमि के साथ ही लोगों की सेहत भी सुधरेगी। इसी रबी सीजन से यह इस खेती की शुरूआत की जा रही है।
- डॉ. राकेश कुमार, उप निदेशक कृषि
चयनित गांव एवं कलस्टर में शामिल किसान
ग्राम किसान
नंदपुर 31
बागाखेडी-1 30
बागाखेडी-2 26
घसौती 30
उमरी खुर्द-1 36
उमरी खुर्द-2 31
कुराली-1 24
कुराली-2 29
किशनखेड़ी 30
दीपाखेड़ी 31
बावैल बुजुर्ग 39
रंडौल 24
रवासैली 27
मांझीपुर एवं कुतुबपुर भूखड़ी 42
डाडवा 32
आलमपुर कलां 23
झिंझौली 20
रामपुर कलां 37
मेघन मजरा 29
गदरहेड़ी 22
नोट: यह आंकड़े कृषि विभाग ने उपलब्ध कराए हैं।