सहारनपुर। जिले में बहुत से ऐसे धार्मिक स्थल है जिन्हें अपने कायाकल्प की दरकार है। इन धार्मिक स्थलों की महत्ता तो काफी है, लेकिन देखरेख और यात्री सुविधाओं के अभाव में यह अपनी पहचान नहीं बना सके हैं। यदि सरकार इनकी सुध ले तो यहां धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ ही स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी उनके दरवाजे पर ही मुहैया होंगे।
छुटमलपुर : डाट काली मंदिर
यूपी उत्तराखंड की सीमा पर सहारनपुर के प्रवेश द्वार पर स्थित डाट काली माता का मंदिर जिला मुख्यालय से साठ किमी दूर स्थित है। वर्ष 1804 में अंग्रेज अफसर जब सहारनपुर को देहरादून से सड़क मार्ग से जोड़ने का काम कर रहे थे तो शिवालिक पहाड़ियों में सुरंग बनाने के लिए जितनी खोदाई दिन में करते रात में उतना ही मलबा नीचे गिर जाता। किवदंती है कि माता ने सपने में आकर मंदिर स्थापित करने का आदेश दिया। मंदिर बनते ही सुरंग का निर्माण कार्य निर्विघ्न पूरा हो गया। यह मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है।
बड़गांव : धूमगढ़ का नाग देवता मंदि
बड़गांव से छह किमी दूर गांव धूमगढ़ में नाग देवता का जिले का इकलौता मंदिर है। मान्यता है कि नाग बाबा मनुष्यों के साथ पशुओं की भी बीमारी हर लेते हैं। बाबा को दूध और उससे बने खाद्य पदार्थों खीर, मावा, पेड़े आदि का प्रसाद चढ़ता है। प्रतिवर्ष रक्षाबंधन के बाद आने वाले रविवार को यहां मेला भरता है। इसमें देश ही नहीं विदेशों से भी श्रद्धालु बाबा के दरबार में हाजिरी लगाने आते हैं।
गंगोह : हजरत कुतुबे आलम की दरगाह
नगर के पश्चिमी छोर पर सराय पट्टी क्षेत्र में विख्यात सूफी संत हजरत कुतुबे आलम की दरगाह स्थित है। बताते हैं कि हुमायूं, इब्राहिम लोदी और बाबर जैसे बादशाह भी यहां हाजिरी भरने आते थे। कहा जाता है कि हुमायूं ने ही हजरत कुतुबे आलम की दरगाह बनवाई थी। यहां प्रतिवर्ष मेला भरता है जिसमे देश विदेश से श्रद्धालु आते हैं।
गंगोह : बाबा हरिदास का मंदिर
नगर के पूर्वी छोर पर हजरत कुतुबे आलम के समकालीन बाबा हरिदास का मंदिर स्थित है। हजरत कुतुबे आलम और बाबा हरिदास रूहानियत के रिश्ते में बंधे थे। आस्था के केंद्र बाबा हरिदास के मंदिर पर भी प्रतिवर्ष मेला लगता है। सांप्रदायिक सद्भाव का यह बड़ा केंद्र है। यहां बड़ी संख्या में देश भर से श्रद्धालु उमड़ते हैं।
बड़गांव से विधायक और लोनिवि राज्य मंत्री बृजेश सिंह ने बताया कि वे अपने विधानसभा क्षेत्र के माता बाला सुंदरी मंदिर देवबंद, जूड़ मंदिर जड़ौदा पांडा, प्राचीन नाग देवता मंदिर धूमगढ़ के सुंदरीकरण के लिए प्रयासरत हैं।