सहारनपुर। त्रिस्तरीय पंचायत के दौरान विकासखंड गंगोह में तीन माह के लिए प्रशासक के तौर पर तैनात किए गए ग्राम विकास अधिकारी प्रदीप कुमार ने हाईकोर्ट की शरण ली है। उनकी वेतन वृद्धि पांच बार रोकी गई। अब अदालत ने शासन के आदेशों को निरस्त कर दिया है, साथ ही मामले की दोबारा जांच के आदेश दिए हैं।
पंचायत चुनाव के दौरान गंगोह विकासखंड में सहायक विकास अधिकारी (एडीओ) प्रमोद कुमार को प्रशासक नियुक्त किया गया था। इनके साथ ही ग्राम पंचायत अधिकारी नीटू कुमार, योगेंद्र, विक्रांत, अमित कुमार, आकाश तोमर, विवेक कुमार, ग्राम विकास अधिकारी जितेंद्र, विकास, प्रदीप कुमार को भी प्रशासक नियुक्त किया था। इनको 98 ग्राम पंचायतों की जिम्मेदारी सौंपी थी। इन पर करीब आठ करोड़ के गबन का आरोप लगा था। एक ग्रामीण की शिकायत मंडलायुक्त जांच कराई थी। जांच रिपोर्ट आरोप लगभग सही पाए गए थे। रिपोर्ट शासन को भेजी गई थी। शासन ने वेतन वृद्धि रोकने के आदेश जारी किए थे। जिसके खिलाफ ग्राम विकास अधिकारी ने प्रदीप कुमार ने हाईकोर्ट में याचिका डाली। प्रदीप कुमार के लिए अदालत ने सुनवाई के दौरान वेतन वृद्धि रोकने के आदेश को निरस्त किया है। वर्तमान में प्रदीप कुमार देवबंद ब्लॉक में तैनात हैंं।
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इसी आधार पर मिलेगी अन्यों को राहत
इसी आधार पर अब प्रशासक के तौर पर नियुक्ति किए अन्य ग्राम विकास अधिकारी व ग्राम पंचायत अधिकारियों को भी राहत मिल सकती है। यह सभी हाईकोर्ट जांच जाने की तैयारी कर रहे है। वहीं, इस मामले में अब पुन: जांच होगी।
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वर्जन
प्रदीप कुमार को हाइकोर्ट से राहत मिली है। मेरे पास अभी आदेश नहीं आए हैं। जो भी आदेश होंगे उसके अनुसार काम किया जाएगा।
-सतेंद्र सिंह, जिला विकास अधिकारी