बसेरों की रहेगी धूम, आज होगा छ़ड़ियों का शृंगार
सहारनपुर। बाबा श्री जाहरवीर गोगा महाराज की शान में इस बार बसेेरों की धूम रहेगी। बीते दो साल में कोरोना की वजह से आयोजन कम हुए थे, लेकिन इस बार स्थिति सामान्य है। ऐसे में श्रद्धालुओं में उत्साह है। रविवार को सभी 26 छड़ियों का शृंगार होगा, जो जिले भर में भ्रमण करेंगी और घर-घर पूजन होगा तथा रात में बसेरों का आयोजन किया जाएगा। इसको लेकर भक्तों ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। गंगोह रोड स्थित मानकमऊ में म्हाड़ी पर पांच सितंबर को शुक्ल पक्ष की दशमी पर तीन दिवसीय मेला शुरू होगा। इसी दिन नेजे की अगुवाई में सभी छड़ियां बैंडबाजों और ढोल-नगाड़ों के साथ अंबाला रोड स्थित श्री विश्रामपुरी काल भैरव मंदिर में पहुंचेंगी। यहां से पूजन के बाद छड़ियां म्हाड़ी पर जाएंगी। मेले में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलावा हरियाणा, पंजाब और राजस्थान से बड़ी संख्या में श्रद्धालु निशान व प्रसाद चढ़ाने पहुंचेंगे। पुलिस-प्रशासन का अनुमान है कि चार से लाख से अधिक श्रद्धालु आएंगे।
लगाए थापे, घर-घर होगा पूजन
शनिवार को बाबा श्री जाहरवीर गोगा महाराज के घर-घर थापे लगाए गए। रविवार को बाबा श्री जाहरवीर की प्रतीक चिह्न 26 छड़ियों का श्रृंगार होगा। इसके बाद छड़ियां भ्रमण करेंगी और घर-घर पूजन होगा। छड़ी के भक्त विनोद प्रकाश का कहना है कि इस खूब बसेरे आयोजित होंगे। कई जगहों पर एक साथ 26 छड़ियों का भी बसेरा होगा। भक्त पंकज उपाध्याय का कहना है कि छड़ियों के शृंगार की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। भक्त गुलशन सागर और अनिल सैनी का कहना है धूमधाम से छड़ियां भ्रमण करेंगी और रात में बाबा जाहरवीर की शान में बसेरे आयोजित होंगे, जिसमें पूजा के बाद कढ़ी-चावल का प्रसाद वितरित किया जाएगा।
कारोबार में होगा इजाफा
व्यापारी नेता गुरमेहर सिंह और रवि जुनेजा का कहना है कि श्री जाहरवीर गोगा महाराज का मेला पूरे देश में सहारनपुर को अलग पहचान दिलाता है। बसेरों से कारोबार में इजाफा होगा। इसमें राशन, बिजली, टेंट, पूजन सामग्री, हलवाइयों को काम मिलेगा। कोरोना की वजह से दो वर्ष कारोबार हलका रहा था।
800 साल पुराना है इतिहास, दिया था नेजा
मेले का इतिहास 800 साल पुराना है। बाबा श्री जाहरवीर गोगा महाराज अक्सर गंगा स्नान के लिए हरिद्वार जाते थे। यात्रा के दौरान वह यहां गंगोह मार्ग पर रुका करते थे। बाबा श्री जाहरवीर ने कबली भगत को गंगोह मार्ग पर तालाब से मछलियां पकड़ते देखा था। तब बाबा ने कबली भगत से कहा था कि वह मछली पकड़ने का काम छोड़कर इस स्थान पर म्हाड़ी बनवाकर पूजा करे। बाबा ने कबली भगत को चांदी का नेजा दिया था। कबली भगत ने बाबा जाहरवीर को अपनी जीविका चलाने की मजबूरी बताई थी। तब बाबा ने कहा था कि यदि वह भादों माह में शुक्ल पक्ष की दशमी को उनके नाम का मेला भरवाएं तो उनकी रोजी-रोटी पूरे वर्ष चलती रहेगी। कबली भगत ने उनकी आज्ञा को माना और यहां म्हाड़ी का निर्माण करा दिया। तभी से म्हाड़ी स्थल पर मेला लगता आ रहा है।
गंगोह रोड स्थित म्हाड़ी पर पूजा अर्चना करते श्रद्घालु- फोटो : SAHARANPUR