- भाजपा और बसपा में भी खूब चल रही भीतरघात
- नाम वापसी के बाद जिले की सभी 12 निकायों पर तस्वीर हुई साफ
जगेंद्र उज्ज्वल
सहारनपुर। निकाय चुनाव में नाम वापसी के बाद जिले की सभी 12 निकायों में उम्मीदवारों की तस्वीर साफ हो गई। इसके साथ ही चुनावी रण तेज हो गया। नामांकन पत्र जमा होने से लेकर नाम वापसी तक सियासी उठापटक खूब हुई। उम्मीदवारों पर आपसी सहमति नहीं होने के कारण सपा-रालोद-आसपा में गठबंधन टिक नहीं सका। गठबंधन में दरार पड़ने के कारण तीनों पार्टी सभी निकायों पर अपने उम्मीदवार भी नहीं उतार सकी। टिकट न मिलने के कारण भाजपा और बसपा में भी भीतरघात खुल कर सामने आई है, जिसका नुकसान पार्टी के उम्मीदवारों को उठाना पड़ सकता है।
जिले में भाजपा के ही सभी 12 निकायों पर प्रत्याशी है। भाजपा में भी टिकट न मिलने से विद्रोह है। सरसावा में पूरी नगर कार्यकारिणी ने निवर्तमान चेयरमैन बिजेंद्र मोगा की पत्नी वर्षा को टिकट देने के विरोध में इस्तीफा दे दिया है। नकुड़ में भी बागी धनीराम को पार्टी नेता मना नहीं सके और वो निर्दलीय के रूप में चुनावी मैदान में हैं। नगर निगम के महापौर के चुनाव में भी पार्टी दो खेमों में बंटी नजर आ रही है।
बसपा ने भी सभी निकायों पर प्रत्याशी उतारे थे, लेकिन बेहट में प्रत्याशी शिफाउल मलिक ने ऐन वक्त पर नाम वापस लेकर पार्टी के साथ भीतरघात कर दी। नकुड़ में साहिल खान ने बागी होकर अपने पिता खालिद खान को चुनावी रण में उतार दिया।
सपा-रालोद-आसपा की बात करें तो ये दल जिले में गठबंधन का फर्ज नहीं नहीं सके। इसके चलते सपा बेहट, सरसावा, चिलकाना, नकुड़ में अपने प्रत्याशी नहीं उतार सकी। अंबेहटा नगर पंचायत रालोद के हिस्से में आई थी, मगर सपा ने यहां इशरत जहां को रालोद की प्रत्याशी रेशमा के सामने खड़ा कर दिया। रालोद केवल अंबेहटा और गंगोह में ही चुनाव मैदान में है। नानौता में रालोद के साथ प्रत्याशी कनीज जेहरा ने खेल करते हुए अपनी जेठानी को जिताने के लिए नामांकन पत्र ही गलत भर कर पर्चा खारिज करा लिया। रामपुर मनिहारान और छुटमलपुर में सपा प्रत्याशियों के सामने आजाद समाज पार्टी ने अपने प्रत्याशी खड़ेे कर दिए हैं।
कांग्रेस की बात करें तो जिले में कांग्रेस भी केवल छह निकायों पर ही अपने प्रत्याशी उतार सकी है। सरसावा में घोषित प्रत्याशी पुनीता ने तो अंतिम समय नामांकन पत्र दाखिल करने से ही मना कर दिया, जबकि रामपुर मनिहारान में प्रत्याशी संतलेश पर्चा खारिज होने चुनावी मैदान से बाहर हो गई।