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पीने योग्य हुआ जनपद की सात नदियों का पानी

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सहंसरा नदी का पानी पीते वैज्ञानिक - फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। जल शक्ति अभियान में शिवालिक से निकलने वाली सात नदियों पर फोकस किया गया है। बीते एक साल में हुए कार्यों का नतीजा है कि सातों नदियों का पानी आप पी सकते हैं। जल निगम द्वारा कराई गई पानी की जांच में भी इसकी पुष्टि हुई है। ।
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पर्यावरण प्लानर डॉ. उमर सैफ ने बताया कि शिवालिक से करीब 24 नदियां निकलती हैं। इनमें से जल शक्ति अभियान में सात नदियों को लिया गया, जिनमें सहंसरा गंगा, नागदेव गंगा, शाकंभरी गंगा, कालूवाला गंगा, सलोनी गंगा, बड़कला गंगा, लालो गंगा शामिल हैं। इन नदियों के पानी को साफ करने के लिए सीडीओ विजय कुमार के नेतृत्व और वैज्ञानिकों की देखरेख में हजारों ट्रैंच बनाई गईं, साथ ही 14 किलोमीटर तक नदियों से अतिक्रमण हटवाया गया। 300 से अधिक सोकपिट बनवाए गए हैं। उन्होंने बताया कि जिन गांवों का दूषित पानी नदियों में छोड़ा जा रहा था, उस पानी को नदियों में गिरने से रोका गया। नतीजा यह हुआ है कि उक्त नदियां करीब 14 किलोमीटर तक पूरी तरह साफ हैं, जिनके पानी को पिया जा सकता है। नदियों में पानी की मात्रा भी बढ़ी है।
हिंडन को साफ करने की कवायद
- कृष्णी नदी का पानी नहाने योग्य हुआ
सहारनपुर। हिंडन नदी को साफ करने के लिए सबसे पहले उसकी सहायक नदी कृष्णी को साफ करने की दिशा में काम चल रहा है। करीब 80 प्रतिशत हिस्सों में नहाने लायक पानी हो गया है, लेकिन नानौता और रामपुर मनिहारान से भारी मात्रा में दूषित पानी कृष्णी में छोड़ा जा रहा है, जिसकी वजह से कृष्णी पूरी तरह साफ नहीं हो पा रही है। अब रामपुर मनिहारान और नानौता नगर पंचायतों में वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगवाने की कवायद शुरू हो गई है। जिसके बाद उक्त पंचायतों से निकलने वाला दूषित पानी साफ करने के बाद कृष्णी में छोड़ा जाएगा। 20 साल से हिंडन नदी के लिए लड़ रहे सेंटर फॉर वाटर पीस के अध्यक्ष एवं गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया के निदेशक संजय कश्यप का कहना है कि जब तक कृष्णी साफ नहीं होगी, तब तक हिंडन के साफ होने की उम्मीद भी करना बेमानी है।
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जनपद में 710 मिलीमीटर ऊपर आया भूगर्भ जल
सहारनपुर। जल संरक्षण को लेकर सहारनपुर ने बेहतरीन कार्य किया है। जल शक्ति अभियान के तहत कई ऐसे कदम उठाए गए हैं, जिनकी बदौलत जनपद में भूगर्भ जल 710 मिलीमीटर ऊपर आया है। इतना ही नहीं, भूगर्भ में 263 बिलियन लीटर पीने का पानी होने का दावा भी अधिकारी कर रहे हैं। इन तमाम उपलब्धियों को देखते हुए जनपद ने नेशनल वाटर अवार्ड के लिए आवेदन भी कर दिया है।
पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने देेशभर में जल शक्ति अभियान की शुरुआत की थी। अभियान का अंतिम लक्ष्य भूगर्भ में जल का संतुलन बनाना था। यानी भूगर्भ से जितना जल हम निकालते हैं उतना ही उसको लौटाएं। पर्यावरण प्लानर डॉ. उमर सैफ ने बताया कि जनपद में मुख्य विकास अधिकारी विजय कुमार के नेतृत्व में इस पर काम शुरू हुआ। उन्होंने विशेषज्ञों को साथ लेकर जनपद में नदियों और पहाड़ों का भ्रमण करते हुए जमीनी हकीकत को जाना। इसके बाद बैठकें बुलाई गईं, जिनमें भूगर्भ जल, सिंचाई विभाग, आईआईटी दिल्ली, आईआईट रुड़की, हिमालयन इंस्टीट्यूट सहित करीब एक दर्जन विभागों और संस्थानों के विशेषज्ञों ने प्रतिभाग किया।
उन्होंने बताया कि करीब पांच हजार छोटे-छोटे, लेकिन सार्थक कदम उठाए गए। गांवों से निकलने वाली नालियां और नालों को नदियों में गिरने से रोका गया या उनको डायवर्ट किया गया, नदियों से सिल्ट निकलवाई गई, नदियों के पानी के उपचार के लिए उनमें पौधों का रोपण कराया गया और सरोवरों का निर्माण कराया गया। नतीजा यह रहा है कि एक वर्ष पहले 2021 में जो भूगर्भ जल 170 मिलीमीटर नीचे था वह बढ़कर 710 मिलीमीटर ऊपर आ गया है, जो उत्साह बढ़ाने वाला आंकड़ा है। इसके अलावा भूगर्भ में 263 बिलियन लीटर पानी सुरक्षित है।
डॉ. सैफ ने बताया कि जल शक्ति अभियान के क्षेत्र में सहारनपुर का प्रदर्शन प्रदेश ही नहीं, देश भर में शानदार रहा है। यही वजह है कि जिलाधिकारी अखिलेश सिंह की ओर से जनपद को सम्मान देने के पक्ष में एक पत्र जल शक्ति मंत्रालय को लिखा गया है। इसके अलावा सीडीओ के माध्यम से पोर्टल पर भी नेशनल वाटर अवार्ड के लिए आवेदन किया गया है।
-जल शक्ति अभियान के तहत किए गए कार्यों के परिणाम उत्साहित करने वाले हैं। एक ओर जहां जनपद में भूगर्भ जल स्तर बढ़ा है। वहीं भूगर्भ में 263 बिलियन लीटर पीने योग्य पानी मौजूद है, जो अच्छा संकेत है। इसके अलावा सात नदियों के पानी को साफ करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। उक्त नदियां करीब 14 किलोमीटर तक पूरी तरह साफ हुई हैं, जिनके पानी को पी भी सकते हैं।
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- विजय कुमार, मुख्य विकास अधिकारी/नोडल अधिकारी, जल शक्ति अभियान।
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