सहारनपुर। पुलिस लाइन स्थित परिवार परामर्श केंद्र टूटते परिवार को जोड़ रहा है। आंकड़ों पर गौर करें तो यहां से एक साल में 124 परिवारों में खुशियां लौट आई। हाथों में लिए हाथ, पति-पत्नी साथ-साथ घर गए। 30 मामलों में एफआईआर दर्ज कराई गई। ज्यादातर मामले पति-पत्नी के एक-दूसरे पर शक करने के हैं।
पति-पत्नी के बीच मामूली बातों से शुरू हुआ मनमुटाव एक-दूसरे से अलग होने तक पहुंच रहा है। परिवार के लोग और रिश्तेदार जब पति और पत्नी के विवादों को नहीं सुलझा पाते हैं तो मामला पुलिस तक पहुंचता है। पति के खिलाफ दहेज उत्पीड़न और अन्य आरोपों में शिकायती पत्र दिया जाता है, जिससे रिपोर्ट दर्ज हो जाए। महिला थाना या फिर एसपी कार्यालय में आने वाले ऐसे शिकायती पत्र को परिवार परामर्श केंद्र भेजा जाता है, ताकि कानूनी कार्रवाई के बजाय समझौता हो सके। केंद्र प्रभारी ममतेश ने बताया कि केंद्र पर सबसे अधिक मामले घरेलू हिंसा के आ रहे हैं। इनके अलावा पति-पत्नी के बीच शक के भी मामले आते हैं। केंद्र पर काउंसलरों की कोशिश ज्यादा से ज्यादा मामलों में सहमति बनाने की होती है। उन्होंने बताया कि जुलाई 2023 से जून 2024 तक परिवार परामर्श केंद्र में 307 प्रार्थना पत्र आए। इनमें से 124 परिवारों के बीच समझौता कराया गया। दो मामलों में फैसला हुआ, जबकि 30 मामलों में एफआईआर दर्ज करानी पड़ी। करीब 29 शिकायतें लंबित है।
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केस नंबर-एक
खाताखेड़ी निवासी रुकसाना (बदला हुआ नाम) ने महिला थाने में प्रार्थना पत्र दिया था। मामला परिवार परामर्श केंद्र पहुंचा। यहां पर पति-पत्नी दोनों को बुलाया और काउंसलरों ने काउंसिलिंग की। दो से तीन बार आना पड़ा। कांउसिलिंग में बात हुई तो शक दूर हो गया। फिर से पति के साथ जाकर रुकसाना काफी खुश हुई।
केस नंबर-दो
पति समीर पत्नी शाजिया (बदले हुए नाम) के काफी दिनों से मायके से नहीं लौटने पर नाराज हो गए थे। बात इतनी बढ़ी कि दोनों को परामर्श केंद्र तक आना पड़ा। दो तारीखों के बाद मामले में रविवार को केंद्र के काउंसलरों ने समझौता करा दिया। राकेश का कहना था कि हम दोनों की गलतफहमियां दूर हो चुकी हैं।