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Saharanpur News: जिस ट्रेन में हुआ था काकोरी एक्शन, कोरोना काल से पड़ी है बंद

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सहारनपुर। आज से ठीक 100 साल पहले सहारनपुर-इलाहाबाद वाया लखनऊ के बीच 8-डाउन पैसेंजर ट्रेन चलती थी। 9 अगस्त 1925 को काकोरी रेलवे स्टेशन के आउटर पर पहुंचते ही ट्रेन अचानक रुकती है। जब गार्ड ने देखा तो ट्रेन में काफी संख्या में क्रांतिकारी सवार हो चुके थे। क्रांतिकारी पंडित रामप्रसाद बिस्मिल और उनके साथियों ने गोलियों की तड़तड़ाहट के साथ सरकारी खजाने पर हमला बोल दिया। आजादी के मतवालों का यह एक्शन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। जिसे आज हम काकोरी ट्रेन एक्शन के नाम से जानते हैं, लेकिन जो ट्रेन इस घटनाक्रम का गवाह बनी बाद में उसका नंबर बदल दिया गया। यह 54252 डाउन बनकर सुबह 8:20 पर सहारनपुर से चलती थी। हालांकि कोरोना काल के दौरान से यह ट्रेन बंद है।
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इस वजह से हुआ का काकोरी ट्रेन एक्शन
दरअसल, अंग्रेजी शासनकाल से गुस्साए लोगों ने 4 फरवरी 1922 को गोरखपुर के एक थाने में आग लगा दी थी। इसमें 23 पुलिसकर्मियों की जलकर मौत हो गई थी। इससे नाराज होकर महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन वापस ले लिया था, जिससे क्रांतिकारियों को बड़ा झटका लगा था। युवा क्रांतिकारियों का संगठन हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन अंग्रेजों से जमकर लोहा ले रहा था। आजादी की इस लड़ाई के लिए धन की जरूरत भी थी। तब शाहजहांपुर में क्रांतिकारी पंडित रामप्रसाद बिस्मिल ने अंग्रेजी सरकार का खजाना लूटने की योजना बनाई थी। जिसे 9 अगस्त 1925 को काकोरी स्टेशन के पास सहारनपुर-लखनऊ ट्रेन में अंजाम दिया गया था। चमड़े के थैले में रखे 4601 रुपये लेकर वहां से भाग निकले। काकोरी ट्रेन एक्शन में पंडित राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां, राजेंद्र नाथ लाहिड़ी और ठाकुर रोशन सिंह को फांसी की सजा सुनाई गई थी, जबकि 17 क्रांतिकारियों को जेल में रहना पड़ा था।

क्रांतिकारियों का बड़ा केंद्र रहा है सहारनपुर
सहारनपुर के प्रद्युमन नगर में रहने वाले शहीदे-ए-आजम भगत सिंह के भतीजे किरणजीत सिंह बताते हैं कि उनका पैतृक गांव जालंधर में खटकड़ कलां है, जिसे अब शहीद भगत सिंह नगर जिले का नाम दे दिया गया है। 1890 में पाकिस्तान लाहौर और लाइलपुर (वर्तमान में फैसलाबाद) चले गए थे। पाकिस्तान का बंटवारा होने के बाद 1950 में सहारनपुर में शिफ्ट हो गए। भगत सिंह की माता विद्यावती देवी भी यहां पर काफी समय रहीं हैं। किरणजीत सिंह बताते हैं कि सहारनपुर क्रांतिकारियों का बड़ा केंद्र रहा है। यहां पर आए दिन क्रांतिकारियों की बैठकें होती रहती थीं। साल 1930 में सहारनपुर के मोहल्ला चौक फरोशान से क्रांतिकारियों की बम फैक्टरी भी पकड़ी गई थी।
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ऐतिहासिक पल की गवाह रही है ट्रेन, कराई जाए शुरू : किरणजीत सिंह
किरणजीत सिंह का कहना है कि जिस ट्रेन में काकोरी एक्शन हुआ था यह वही ट्रेन है, जो कुछ साल पहले तक चल रही थी। कुछ दिन पहले पता चला कि कोरोना के दौरान इस ट्रेन को बंद कर दिया गया। रेल मंत्री से मांग करेंगे कि इस ऐतिहासिक ट्रेन को दोबारा शुरू कराया जाए।
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