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Saharanpur News: पहाड़ों की बारिश से आई नदियां उफान पर

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ग्राउंड रिपोर्ट-
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- मैदानी क्षेत्रों हुई बरसात का नहीं पड़ा था इतना असर


(मेरठ, दिल्ली, चंडीगढ़ सेंटर के ध्यानार्थ)



यमुना की सहायक नदियों ने बढ़ाई बाढ़ की विभीषिका

- 10 और 11 जुलाई को छोड़ा गया तीन लाख क्यूसेक से भी ज्यादा पानी


सहारनपुर/बेहट। सहारनपुर से लेकर दिल्ली तक आई बाढ़ के दौरान पूर्वी और पश्चिमी यमुना नहरें सूखी पड़ी थीं। पहाड़ों और मैदानी क्षेत्रों में हुई बारिश के बाद यमुना नदी उफान पर आ गई। मैदानी क्षेत्रों में हुई बारिश का इतना फर्क नहीं पड़ा, जितना पहाड़ों में हुई बारिश ने कहर को बढ़ा दिया।इसके साथ ही घाड़ की बरसाती नदियों और हिंडन, उसकी सहायक नदी कृष्णा, काली, ढमोला, पांवधोई के पानी ने यमुना में मिल कर बाढ़ की विभीषिका ओर बढ़ाने का काम किया। बाढ़ के इस पानी ने दिल्ली तक हालात खराब कर दिए।

यूपी और हरियाणा की सीमा पर वर्ष 1999 में स्थापित हथनीकुंड परियोजना से यूपी, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश राज्यों को जल वितरण की व्यवस्था के लिए बनाया गया। यहां बैराज का पूरा कंट्रोल हरियाणा के सिंचाई विभाग के पास है। यूपी को पूर्वी यमुना नहर, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान को पश्चिमी यमुना नहर से जल वितरण की व्यवस्था की जाती है। सामान्य दिनों में बैराज से कुल पानी का 33 प्रतिशत यूपी की पूर्वी यमुना नहर और 66 प्रतिशत हरियाणा को जाने वाली पश्चिमी यमुना नहर में छोड़ा जाता है। इसमें से सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर यमुना नदी को जीवित रखने और पशु पक्षियों के लिए 352 क्यूसेक पानी हर स्थिति में बैराज से यमुना नदी में छोड़ा जाता है। केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय के समझौते के अनुसार 80 से 90 हजार क्यूसेक तक पूर्वी और पश्चिमी यमुना नहरों व यमुना नदी में वितरण की व्यवस्था की जा सकेगी। इससे ज्यादा जलस्तर होने पर पूरा पानी यमुना नदी में छोड़ा जाएगा।
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वर्ष 2013 में बैराज से छोड़ा गया था आठ लाख क्यूसेक पानी
वर्ष 2013 में हिमाचल प्रदेश की पहाड़ियों में भारी बारिश होने पर यमुना नदी बैराज से आठ लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। इससे जनपद सहारनपुर के निचले इलाकों नकुड, गंगोह के अलावा शामली, बागपत और दिल्ली में भयंकर बाढ़ आई थी। पहले भी हथिनीकुंड बैराज से जलस्तर बढ़ने पर यमुना नदी में पानी छोड़े जाने से दिल्ली डूबती रही है।



9 जुलाई से 13 जुलाई तक हथनीकुंड बैराज से छोड़ा सर्वाधिक पानी

तारीख जलस्तर (क्यूसेक में)

9 जुलाई 2,51,287

10 जुलाई 3,09, 526

11 जुलाई 3,59,760

12 जुलाई 2,23,730

13 जुलाई 1,53,768



नौ जुलाई को बैराज पर एक लाख क्यूसेक से अधिक जलस्तर होने पर शाम चार बजे हरियाणा को जाने वाली पश्चिमी व यूपी की पूर्वी यमुना नहरों को बंद कर दिया गया था। 13 जुलाई को जलस्तर कम होने पर हरियाणा की पश्चिमी यमुना नहर में शाम पांच बजे, यूपी की पूर्वी यमुना नहर में 14 जुलाई की शाम चार बजे पानी छोड़ा गया था।



रविवार को हथनीकुंड बैराज पर जलस्तर की स्थिति

रविवार को हथनीकुंड बैराज पर दोपहर 12 बजे जलस्तर 83 हजार 141 क्यूसेक था, जिसमें से 67 हजार 821 क्यूसेक पानी यमुना नदी व शेष पानी पश्चिमी और पूर्वी यमुना नहर में शेयर के हिसाब से छोड़ा गया। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि पूर्वी यमुना नहर की क्षमता 4400 और पश्चिमी यमुना नहर की क्षमता 18000 क्यूसेक पानी की है।
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नोट: हथनीकुंड बैराज कंट्रोल से दी गई जानकारी के अनुसार



वर्जन:-

यमुना में 80-90 हजार क्यूसेक से अधिक पानी आने पर उसमें पत्थर, रेत, बजरी आदि खनिज बहकर आते हैं। यदि इस पानी को पूर्वी और पश्चिमी नहरों छोड़ा जाता है तो दोनों नहरें सिल्ट जमने से बंद हो जाएगी और पूरी वितरण व्यवस्था ध्वस्त हो जाएगी। इससे बैराज को भी खतरा उत्पन्न हो जाएगा। हथनीकुंड बैराज है बांध नहीं। इसलिए यहां पानी स्टोर नहीं किया जा सकता। हिमाचल की पहाड़ियों से आने वाले पानी को बैराज से आगे हर सूरत में छोड़ना ही पड़ता है।

-अभिमन्यु राय

अधिशासी अभियंता पूर्वी यमुना नहर

धर्मेंद्रअभिमन्यु वालिया
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