सहारनपुर। मौसम बदलने से चिकन पॉक्स के मामले बढ़े हैं। सरकारी और निजी अस्पतालों में चिकन पॉक्स के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। शहर में कई बच्चे और युवा चिकन पॉक्स से पीड़ित मिले हैं। जिला अस्पताल में चर्म रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में सबसे ज्यादा चिकन पॉक्स के ही मरीज आ रहे।
सेठ बलदेव दास बाजोरिया जिला चिकित्सालय में प्रतिदिन 1300 से 1500 मरीजों की ओपीडी है। जब से मौसम में बदलाव हुआ है तब से चर्म रोग के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। प्रतिदिन 250 से 300 मरीज सिर्फ चर्म रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में पहुंच रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा 120 से 130 मरीज चिकन पॉक्स के हैं।
चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. केवी सिंह ने बताया कि चिकन पॉक्स संक्रामक बीमारी है। यह दस साल तक के बच्चों में तेजी से फैलती है। घर में एक बच्चे को हो जाने पर अन्य बच्चों को होने की आशंका ज्यादा रहती है। उन्होंने बताया कि इससे पीड़ित मरीज घर से न निकलें और घर पर ही आइसोलेट में रहें।
इसके अलावा वायरल के मरीजों की भी संख्या तेजी से बढ़ी है। उल्टी-दस्त के मरीजों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। 25 से 30 मरीज प्रतिदिन उल्टी-दस्त के पहुंच रहे हैं।
समय पर कराएं इलाज, झाड़-फूंक के चक्कर में न पड़े
जिला अस्पताल के चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. केवी सिंह बताते हैं कि चिकन पॉक्स संक्रामक बीमारी है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में लोग इसे माताजी कहते हैं। इसका इलाज है। सही समय पर इलाज होने से मरीज पूरी तरह से स्वस्थ हो जाता है। चिकित्सक को दिखाएं। झाड़-फूंक के चक्कर में न पड़े।
ये हैं बचाव और उपचार
-अगर किसी बच्चे को यह बीमारी हो जाती है तो उसे स्कूल व कहीं बाहर न जाने दें।
-मरीज को अलग रखना जरूरी है।
-मरीज की नाक व मुंह से निकले वाले स्त्राव को जमीन में दबा देना चाहिए।
-जूस, नारियल, पानी का सेवन ज्यादा से ज्यादा करें।
-मरीज को छींकने और खांसते समय नाक व मुंह पर कपड़ा रखना चाहिए।
-ये हैं लक्षण
-तेज बुखार आना।
-त्वचा पर गुलाबी रंग के दाने विकसित होना।
-ये दाने मुंह, सिर, गर्दन, पेट, पीठ छाती पर दिखाई देते हैं।
-शरीर में दाने बड़े या फिर छोटे आकार के होते हैं।