सहारनपुर। पर्यूषण पर्व के चतुर्थ दिवस पर जैन बाग स्थित प्राचीन श्री दिगंबर जैन मंदिर और मोहल्ला चौधरीयान स्थित चमत्कारी श्री दिगंबर मंदिर में श्रद्धाभाव से श्रीजी का मंगल अभिषेक एवं शांतिधारा की गई। जैन मुनि ने कहा कि उत्तम शौच धर्म का पालन करने वाला सदैव पवित्र होता है।
शनिवार को आयोजित कार्यक्रम में उत्तम शौच धर्म पर मंगल देशना देते आचार्य ज्ञेय सागर महाराज ने कहा कि आत्मा के परिणामों में शुचिता होना शौच है, वह शुचिता जब सम्यकदर्शन के साथ होती है, तब उत्तम शौच धर्म नाम पाती है। लोभ के अभाव को शौच धर्म कहा जाता है। प्रथम दृष्टा में संसार में शरीर की शुद्धता को ही शुद्धता माना जाता है, लेकिन जैन धर्म में शरीर की शुद्धता से अधिक परिणामों की विशुद्धि पर बल दिया है और वह शुद्धता लोभ का त्याग करने पर प्रकट होती है। जीव के परिणामों में संतोष होना चाहिए तथा देह से उसे सदैव तपस्या करनी चाहिए।। इस दौरान जैन समाज के अध्यक्ष राजेश जैन, अनिल जैन, चौधरी अनुज चौधरी, अनिल जैन, राजीव जैन, टीटू नवीन जैन, नितिन जैन, अजय जैन, रमेश जैन संदीप जैन, अल्पेश जैन, आदिश जैन, नमेश्वर जैन, संजय, अंकित जैन, अनमोल जैन शुभम, संभव, शौर्य, नमन, शिवम जैन मौजूद रहे।
इस मंदिर में हर मुराद होती है पूरी
जैन समाज के अध्यक्ष राजेश जैन ने कहा कि मोहल्ला चौधरीयान में एशिया सबसे प्राचीन चमत्कारी श्री दिगंबर जैन मंदिर है, जहां पर एक वेदी पर विराजमान प्रतिमाएं चारों दिशाओं से दर्शन देती है, जो 290 अष्टधातु से बनी हैं, जो कि एशिया की सबसे प्राचीन प्रतिमाएं हैं। चांदी की भव्य वेदी में आठवें तीर्थंकर भगवान चंद्रप्रभु की अतिशयकारी पाषाण की प्रतिमा विराजमान है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति मन, वचन, काय की विशुद्धि के साथ निस्वार्थ भाव से इस मंदिर पूजा अर्चना करता है, उसके सारे दुख संकट समाप्त हो जाते हैं।