उन्होंने कहा कि जमीयत यह स्पष्ट कर देना चाहती है कि वक्फ संपत्तियां मुसलमानों के पुरखों के दिए हुए वह दान हैं, जिन्हें धार्मिक और मुस्लिम कार्यों के लिए समर्पित किया गया है। सरकार ने बस उन्हें विनियमित करने के लिए वक्फ एक्ट बनाया है।
मौलाना मदनी ने कहा कि इसी तरह वक्फ बोर्डों के अधिकारों को कम या सीमित करने को भी हम स्वीकार नहीं कर करेंगे। उन्होंने कहा कि यह एक प्रकार से मुसलमानों को दिए गए संवैधानिक अधिकारों में जानबूझकर किया गया हस्तक्षेप है।
मुसलमानों ने जो वक्फ किया है और जिस उद्देश्य के लिए वक्फ किया है वक्फकर्ता की इच्छा के खिलाफ उसे प्रयोग नहीं कर सकते, क्योंकि यह प्रॉपर्टी अल्लाह के लिए समर्पित होती है। मदनी ने कहा कि पूर्व में भी सरकार ने यूसीसी और तीन तलाक सहित अन्य मुस्लिमों के मुद्दों में बिना वजह हस्तक्षेप किया है।