- कुल 2,571 में से 1,887 आवेदनकर्ताओं के आवेदन हुए निरस्त, निराश होकर लौट रहे अभिभावक
जगदीप कुमार,
सहारनपुर। शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) के एक नियम की वजह से मनचाहे स्कूल में पढ़ने का मासूमों का सपना टूट रहा है। पहले चरण में हुए 2,571 आवेदनों में से 1,887 आवेदन निरस्त कर दिए गए हैं, क्योंकि उनके वार्ड या ग्राम पंचायत में अंग्रेजी माध्यम (सीबीएसई या आईसीएसई से मान्यता प्राप्त) का स्कूल नहीं है। ऐसी स्थिति में यदि उन्हें मनचाहे स्कूल में पढ़ना है तो सामान्य छात्रों की तरह पूरी फीस चुकानी होगी या फिर आर्थिक रूप से कमजोर अन्य विद्यार्थियों की तरह किसी भी सरकारी स्कूल में पढ़ना होगा।
कानून 14 वर्ष की आयु के बच्चों और किशोरों की अनिवार्य और अच्छी शिक्षा की पैरवी करता है। जिसके तहत निजी विद्यालयों में 25 फीसदी सीटें एक तरह से आरक्षित हैं। जिन पर आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को दाखिला देने का नियम है। ऐसे विद्यार्थियों को अंग्रेजी माध्यम के स्कूल में दाखिला बेसिक शिक्षा विभाग के माध्यम से दिलाया जाता है। इसके लिए प्रत्येक वर्ष आवेदन की प्रक्रिया अपनाई जाती है।
तीन चरण में ऑनलाइन आवेदन किए जाते हैं। पहले चरण के आवेदन किए जा चुके हैं। इनमें जिले भर में 2,571 अभ्यर्थियों द्वारा आवेदन किए गए, लेकिन उनमें से मात्र 684 ही आवेदन स्वीकार किए गए हैं, जिनमें से 599 बच्चों का दाखिला कराया जा चुका है, लेकिन 1,887 आवेदन निरस्त कर दिए गए हैं। ज्यादातर आवेदन उन अभ्यर्थियों के निरस्त हुए हैं, जिनके वार्ड या ग्राम पंचायत में अंग्रेजी माध्यम का स्कूल नहीं है। दरअसल, आरटीई का नियम है कि जिस वार्ड या ग्राम पंचायत में अंग्रेजी माध्यम (सीबीएसई या आईसीएसई) का स्कूल नहीं है तो वह किसी अन्य वार्ड या ग्राम पंचायत में स्थित स्कूल में आरटीई के तहत दाखिला पाने के हकदार नहीं हैं।
ऑनलाइन आवेदन ने बढ़ाई मुश्किल
अपने ही वार्ड या ग्राम पंचायत के स्कूल में दाखिला मिलने का शासनादेश 2013 का है, लेकिन पहले आवेदन ऑफलाइन किए जाते थे। ऐसे में किसी भी वार्ड या ग्राम पंचायत का अभ्यर्थी अपने मनचाहे स्कूल में दाखिला पा जाता था, लेकिन ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू होने के बाद से ऐसा नहीं हो रहा है। जिसकी वजह से बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों और अभिभावकों को निराशा हाथ लग रही है। ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 2018 से चल रही है।
इसलिए बना नियम
आवेदक को उसके वार्ड या ग्राम पंचायत में स्थित स्कूल ही में दाखिला दिए जाने का नियम बनाया गया है। यदि इस तरह का नियम नहीं होता तो यह संभव था कि ज्यादातर अभ्यर्थियों ने किसी ऐसे एक ही स्कूल के लिए आवेदन कर दिया, जो जनपद का सबसे बढ़िया और महंगा स्कूल हो। ऐसी स्थिति में किन अभ्यर्थियों को दाखिला दिया जाना है और किनको नहीं यह समस्या खड़ी हो जाती।
आरटीई में अभ्यर्थियों को उनके ही वार्ड या ग्राम पंचायत स्थित स्कूल में दाखिला दिए जाने का नियम है। यदि ऐसा नहीं होता तो किसी एक या दो स्कूलों के लिए सबसे अधिक आवेदन आते। यह भी बात सही है कि जिन वार्डों या ग्राम पंचायतों में अंग्रेजी माध्यम के स्कूल नहीं हैं वहां के आवेदन निरस्त हो रहे हैं।
- अंबरीष कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी।