सहारनपुर। मल्हीपुर रोड पर 135 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) का एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) बनाया जाएगा। एसटीपी पर 528 करोड़ रुपये की लागत आएगी। खास बात यह है कि एसटीपी के जरिए शहर भर से निकलने वाले दूषित पानी को साफ कर ढमोला नदी में छोड़ा जाएगा। चूंकि ढमोला नदी हिंडन की सहायक नदी है। ऐसे में इससे हिंडन नदी की भी हालत सुधरेगी।
केंद्र सरकार की नमामि गंगे योजना के तहत एसटीपी की प्रक्रिया 2019 में शुरू हुई थी। एसटीपी के लिए 6.5 हेक्टेयर यानी करीब 100 बीघा भूमि चाहिए थी। मामले को जल निगम (शहरी) देख रहा था, लेकिन 2019 में कोरोना आने के बाद एसटीपी का कार्य लटक गया। वर्ष 2022 में जल निगम ने जमीन फाइनल की, लेकिन उसके बाद यह जिम्मेदारी जल निगम (ग्रामीण) के पास चली गई। एनजीटी के नियम और शर्तें भी इसमें आड़े आई, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह साफ हो चुकी है।
डीपीआर ( विस्तृत परियोजना रिपोर्ट ) को स्वीकृति मिल चुकी है। 16 मार्च को बिड खुलेगी, जिसके बाद टेंडर की प्रक्रिया पूर्ण कर ली जाएगी। अप्रैल में एसटीपी का निर्माण कार्य शुरू कर देने का लक्ष्य जल निगम के अधिकारियों ने रखा है। खास बात यह है कि एसटीपी से महानगर की सीवर लाइनों और नालों को जोड़ा जाएगा और शहर से निकलने वाले दूषित पानी को साफ कर ढमोला नदी में छोड़ा जाएगा। अभी तक यह पानी ढमोला और पांवधोई नदी को दूषित बना रहा है।
पानी साफ होने से एक ओर जहां पांवधोई और ढमोला नदी साफ होंगी। वहीं सबसे बड़ा असर हिंडन नदी पर भी पड़ेगा, क्योंकि यह दोनों हिंडन की सहायक नदियां हैं। अभी तक महानगर में 28 एमएलडी का एसटीपी है, जो मल्हीपुर रोड पर ही बना है।
शहर में बनेंगे नौ आईपीएस
शहर भर की सीवर लाइनों और नालों को एसटीपी तक पहुंचाने के लिए शहर में नौ आईपीएस (इंटरमीडिएट पंपिंग स्टेशन) बनेंगे। इनके लिए जमीन चिह्नित की जा चुकी है। फिलहाल शहर में तीन आईपीएस पहले से बने हुए हैं, जिनमें राकेश टाकिज, दालमंडी पुल के आईपीएस शामिल हैं।
मल्हीपुर रोड पर बनने वाले 135 एमएलडी के एसटीपी पर 528 करोड़ रुपये खर्च आएगा। जमीन फाइनल हो चुकी है। हमारा प्रयास यही है कि जितना जल्दी हो सके एसटीपी तैयार हो, जिससे नदियों में दूषित पानी गिरने से रोका जा सके। - अमित कुमार, अधिशासी अभियंता, जल निगम (ग्रामीण)।