सहारनपुर। जनपद में धान फसल में तना छेदक कीट का प्रकोप बढ़ रहा है। इससे प्रभावित पौधे की ऊपरी गोभ सूख जाती है। जिसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ सकता है।
प्रभावित फसल में तनाछेदक कीट के भूरे रंग के अंडों का एक झुंड पत्ती की चोटी के पास चिपका रहता है। इस अंडों से छोटी-छोटी गिडारे निकलकर पौधे के नीचे पहुंचकर उसके मुख्य तने में छेद करके प्रवेश करती है। यह कीट प्रभावित पौधे को ऊपर से काट देता है, जिससे गोभ खींचने पर आसानी से निकल जाती है। प्रभावित पौधे की बाली सफेद रंग की सूखी सी दिखाई देती है, जिसमें दाने नहीं होते हैं। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी एवं फसल सुरक्षा विभाग के प्रोफेसर डॉ.आई के कुशवाहा ने बताया कि इससे बचाव के लिए फसल में एक लाइट ट्रेप प्रति हेक्टेयर की दर से लगाएं या पांच फेरोमोन ट्रैप प्रति हेक्टेयर की दर से लगाएं या दो ट्राइकोग्रामा जापोनिकम कार्ड प्रति एकड़ की दर से सप्ताह के अंतर से तीन बार लगाएं। इस पर नियंत्रण के लिए नीम तेल तीन मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।
रासायनिक कीटनाशकों में कार्टेप हाइड्रोक्लोराइड 50 एसपी की 250 ग्राम,इमामेक्टीन बेंजोएट पांच प्रतिशत की 100 ग्राम मात्रा को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करना मुफीद रहता है। यदि तनाछेदक कीट का वयस्क फसल में दिखाई दे रहा हो तो क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 18 प्रतिशत 100 मिली और डेल्टामेथरिन 100 मिली को 200 लीटर पानी में प्रति एकड़ मिलाकर छिड़काव करें।